दरोगा अजय कुमार गौड़ की संदिग्ध मौत पर राजनीति तेज, समाजवादी पार्टी ने कर दी अब ये मांग

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में तैनात दरोगा अजय कुमार गौड़ की संदिग्ध मौत का मामला अब राजनैतिक रूप लेता जा रहा है। यह प्रकरण न केवल पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई अहम प्रश्न सामने ला रहा है। आठ फरवरी को दरोगा अजय कुमार गौड़ का शव अयोध्या जनपद में सरयू नदी में संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद से परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।

सोमवार को समाजवादी पार्टी के सांसद रामप्रसाद चौधरी के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मृतक दरोगा के पैतृक गांव देवरिया के मुड़ाडीह पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिला स्तरीय पदाधिकारी और जन प्रतिनिधि शामिल रहे। गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। दरोगा के पिता, पत्नी, भाई और अन्य परिजनों ने रोते-बिलखते हुए पूरी घटना का क्रमवार विवरण नेताओं के सामने रखा।

परिजनों ने बताया कि अजय कुमार गौड़ एक फरवरी को ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकले थे। उस दिन के बाद से उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। कई घंटों तक संपर्क न होने के बावजूद परिवार को न तो कोई स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही समय रहते खोजबीन शुरू की गई। परिजनों का आरोप है कि अगर शुरुआती स्तर पर ही गंभीरता दिखाई जाती, तो शायद आज अजय कुमार गौड़ जिंदा होते।

परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जब दरोगा की तैनाती परसरामपुर थाने में थी, तो उनकी बाइक कोतवाली अमहट क्षेत्र के पास कैसे मिली। यह तथ्य पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे किसी बड़ी लापरवाही या साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

आठ फरवरी को जब सरयू नदी में दरोगा का शव बरामद हुआ, तो पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव मिलने की स्थिति, स्थान और समय को लेकर भी परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि घटना से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं। पुलिस की ओर से दी जा रही जानकारी और जमीनी हकीकत में भी फर्क दिखाई दे रहा है।

समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों की बातों को गंभीरता से सुना और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। नेताओं ने कहा कि दरोगा के मोबाइल फोन का डेटा रिकवर किया जाना बेहद जरूरी है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन हिस्ट्री से यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना से पहले दरोगा किन लोगों के संपर्क में थे और किन परिस्थितियों में वह उस स्थान तक पहुंचे, जहां से बाद में उनका शव मिला।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सपा सांसद और राष्ट्रीय सचिव राम प्रसाद चौधरी ने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या साजिश सामने आती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। सपा नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल एक पुलिसकर्मी की मौत नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मामला है। यदि जरूरत पड़ी तो इस पूरे प्रकरण को सदन में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।

सांसद रामप्रसाद चौधरी ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी उनके साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी चुप नहीं बैठेगी।

दरोगा अजय कुमार गौड़ की मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। परिजनों की मांग, राजनीतिक हस्तक्षेप और जनचर्चा के बाद यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या इस मामले में वास्तव में सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।

First Published on: February 17, 2026 6:14 PM
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