नई दिल्ली। नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने को लेकर सरकार ने 16 से लेकर 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में सरकार तीन महत्वपूर्ण बिल लेकर आने वाली है जिनसे 2029 लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू हो जाएगा। संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन देश की बदलती जनसंख्या संरचना, राज्यों के बीच जनसंख्या असंतुलन, शहरीकरण और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विधेयक की पृष्ठभूमि
संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के तहत हर जनगणना के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) का प्रावधान है। हालांकि, वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों के आवंटन को संविधान (84वां संशोधन) अधिनियम, 2001 के माध्यम से वर्ष 2026 के बाद की पहली जनगणना तक स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद संविधान (87वां संशोधन) अधिनियम, 2003 के जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया, लेकिन कुल सीटों की संख्या यथावत रखी गई।
वर्तमान में देश की जनसंख्या संरचना में व्यापक बदलाव, राज्यों के बीच जनसंख्या वृद्धि में असमानता, आंतरिक प्रवासन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है।
विधेयक के तहत लोकसभा की संरचना में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित हैं:
- लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव
- 815 सदस्य राज्यों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा
- 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से
यह वृद्धि देश की वर्तमान जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
जनसंख्या की नई परिभाषा
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या का अर्थ उस जनगणना से होगा, जिसे संसद कानून द्वारा निर्धारित करेगी और जिसके आधिकारिक आंकड़े प्रकाशित हो चुके होंगे। यह प्रावधान राष्ट्रपति चुनाव (अनुच्छेद 55), लोकसभा (अनुच्छेद 81), राज्य विधानसभाओं (अनुच्छेद 170) और आरक्षण से जुड़े प्रावधानों (अनुच्छेद 330, 332) में समान रूप से लागू होगा।
डिलिमिटेशन प्रक्रिया में सुधार
- सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का कार्य अब स्पष्ट रूप से डिलिमिटेशन आयोग को सौंपा जाएगा
- प्रत्येक जनगणना के बाद वाले प्रावधान को हटाकर प्रक्रिया को अधिक लचीला और समयानुकूल बनाया गया है
- 2026 के बाद की जनगणना के इंतजार की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है
इससे पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
महिला आरक्षण को मिलेगा वास्तविक रूप: यह विधेयक संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के क्रियान्वयन को गति देने के लिए लाया गया है।
प्रमुख प्रावधान
- लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- यह आरक्षण डिलिमिटेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
- आरक्षित सीटों का रोटेशन किया जाएगा, ताकि विभिन्न क्षेत्रों को समान अवसर मिले।
- आरक्षण की अवधि 15 वर्ष निर्धारित की गई है (जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है)।
इस कदम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण में संशोधन
विधेयक में पूर्वोत्तर राज्यों के विशेष सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए संशोधन किए गए हैं:
- अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में ST प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए विशेष प्रावधान
- त्रिपुरा में भी वर्तमान प्रतिनिधित्व के अनुपात को संरक्षित रखने की व्यवस्था
संवैधानिक संतुलन और निरंतरता सुनिश्चित
- नए प्रावधान लागू होने तक वर्तमान लोकसभा और विधानसभाओं का कार्यकाल अप्रभावित रहेगा
- डिलिमिटेशन के बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी
- इससे शासन और प्रतिनिधित्व में निरंतरता बनी रहेगी
सरकार कुल तीन बिल इस सत्र में लेकर आएगी। संविधान संशोधन 131 जिसमें सीटों की संख्या बढ़ाए जाने का प्रस्ताव होगा। दूसरा बिल डेलिमिटेशन बिल 2026, जिसके तहत डेलिमिटेशन कमिशन का गठन किया जाएगा और तीसरा बिल यूनियन टेरिटरी लॉज ( संशोधन) 2026 होगा।
