भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। ब्रिक्स देशों ने शनिवार को नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया। पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच मतभेदों के बावजूद घोषणा पर सहमति बनी। हालांकि, इसमें ईरान पर अमेरिका के हमलों या कई खाड़ी अरब देशों पर ईरानी सेना के हमलों का सीधे तौर पर कोई जिक्र नहीं किया गया।
नई दिल्ली घोषणा में रूस-यूक्रेन युद्ध की भी आलोचना नहीं की गई। वहीं, गाजा में जारी हिंसा को लेकर इजरायल पर कड़ी टिप्पणी की गई और फिलिस्तीनी लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की जरूरत बताई गई।
BRICS ने अमेरिका का नाम लिए बिना व्यापार को सीमित करने वाले कदमों, मनमाने टैरिफ, गैर-टैरिफ उपायों और संरक्षणवाद पर गंभीर चिंता जताई। समूह ने कहा कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को और कम कर सकते हैं, वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर सकते हैं और मौजूदा आर्थिक असमानताओं को बढ़ा सकते हैं।
ईरान और UAE के बीच मतभेदों के बावजूद बनी सहमति
सूत्रों के मुताबिक, घोषणा के अंतिम मसौदे पर शनिवार दोपहर सहमति बनी। यह सहमति घोषणा जारी होने से कुछ घंटे पहले बनी, जिसे करीब 4:30 बजे पेश किया गया।
BRICS में किसी भी संयुक्त घोषणा के लिए सभी सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यानी कोई एक देश भी अंतिम घोषणा को रोक सकता है। पश्चिम एशिया संकट से जुड़े हिस्से पर ईरान और UAE ने शुरुआत में अपना रुख कड़ा रखा था।
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने दोनों देशों को उनके क्षेत्रों पर हुए हमलों की स्पष्ट निंदा की मांग छोड़ने के लिए तैयार किया। इसके साथ ही रूस की ओर से संघर्षों के संदर्भ को नरम करने की मांग को भी समायोजित किया गया। भारत ने पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों के साथ संबंध सुधारने की ईरान की व्यापक कोशिश का भी इस्तेमाल करते हुए सहमति बनाने की दिशा में काम किया।
बातचीत और कूटनीति से समाधान पर जोर
BRICS नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष को बातचीत और कूटनीति के जरिए खत्म करने की भारत की स्थिति का समर्थन किया। घोषणा में वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत बताई गई।
घोषणा में कहा गया कि पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ने को लेकर गहरी चिंता है। सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है।
BRICS ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। इसमें देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात कही गई।
घोषणा में कहा गया कि बातचीत और कूटनीति के जरिए लंबे समय की समझ बनाने के प्रयास बढ़ाए जाने चाहिए, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता कायम हो सके।
गाजा में हिंसा पर इजरायल की आलोचना
BRICS ने पिछले साल अक्टूबर में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद गाजा में जारी हिंसा पर गंभीर चिंता जताई। समूह ने गाजा से फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने वाली किसी भी नीति को रोकने की मांग की।
घोषणा में कहा गया कि ऐसी व्यवस्थाओं को लेकर चिंता है, जो फिलिस्तीनी लोगों के अपरिहार्य अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकती हैं या कब्जे को वैध ठहरा सकती हैं अथवा उसे लंबे समय तक जारी रख सकती हैं।
BRICS ने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों को पूरा करना जरूरी है, जिसमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार भी शामिल है।
