‘2019 में मुख्यमंत्री बनने के लिए महाराष्ट्र की पीठ में छुरा घोंपा’: एकनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला

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महाराष्ट्र Updated On :

नई दिल्ली : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 2019 में महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के गठन को राज्य के राजनीतिक इतिहास की ‘सबसे बड़ी वोट चोरी’ बताया। शिवसेना की डायमंड जुबली दशहरा रैली के दौरान उन्होंने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर जनादेश के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

‘जनादेश से विश्वासघात करने वाले ही वोट चोर’

मंगलवार को गोरेगांव में आयोजित रैली में पार्टी नेताओं, सांसदों, विधायकों और शिवसैनिकों की बड़ी मौजूदगी के बीच शिंदे ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना और भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन बाद में शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई।

शिंदे ने आरोप लगाया, “जब शिवसेना-भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था, तब आपने महा विकास अघाड़ी के साथ सरकार बनाई। यह सबसे बड़ी वोट चोरी थी। मुख्यमंत्री बनने के लिए महाराष्ट्र की पीठ में छुरा घोंपने वाले ही असली वोट चोर हैं।”

राहुल गांधी और विपक्ष पर भी साधा निशाना

शिंदे ने विपक्षी गठबंधन INDIA पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने और देश को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालना देश की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था का अपमान है। शिंदे ने आरोप लगाया कि विपक्ष संविधान का हवाला देते हुए उन्हीं संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है, जिनकी स्थापना में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की अहम भूमिका रही।

2019 में कैसे बदले महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण?

2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था और दोनों दलों ने मिलकर बहुमत हासिल किया था। हालांकि, मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद के बाद शिवसेना ने भाजपा से दशकों पुराने गठबंधन से अलग होने का फैसला किया।

इसके बाद शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर महा विकास अघाड़ी सरकार बनाई। उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

जून 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में बंट गई। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया।

किसानों और मजदूरों के समर्थन का वादा

शिंदे ने किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केवल भाषण देने के लिए नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े रहने के लिए राजनीति करती है। उन्होंने किसानों और मजदूरों को हरसंभव मदद देने का भरोसा जताया।

रैली में शिवसेना के मंत्री, सांसद, विधायक, पदाधिकारी, प्रवक्ता और बड़ी संख्या में शिवसैनिक मौजूद रहे।

उद्धव ठाकरे ने भी सरकार पर लगाए आरोप

इससे पहले उद्धव ठाकरे ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सत्ता परिवर्तन की अपील की थी। उन्होंने भाजपा पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों, किसानों को मुआवजा देने में कथित नाकामी, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।

ठाकरे ने सूखे और किसानों की आर्थिक परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार राहत देने के वादे तो करती है, लेकिन प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने घोषित 5,000 रुपये की सहायता और कर्जमाफी के लाभार्थियों की संख्या को लेकर भी सवाल किए।