अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से भारत को सीमित राहत की उम्मीद

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अर्थव्यवस्था Updated On :

नई दिल्ली। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों से भारत को निकट भविष्य में केवल मामूली राहत मिलने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतों, रूस से तेल खरीद पर संभावित टैरिफ और व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता भारत के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी रहेंगी। केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की एक रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण ईरान संघर्ष को लेकर कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है। इससे भारतीय रुपये और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को भी कुछ समर्थन मिल सकता है। हालांकि, भारत पर इसका तत्काल आर्थिक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि प्रमुख नीतिगत फैसले अब भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस के अधिकार क्षेत्र में हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए मध्यावधि चुनाव के नतीजे जोखिमों के संतुलन में बदलाव हैं, न कि कोई बड़ा निर्णायक मोड़।

कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर

केयरएज ने कच्चे तेल की कीमतों को भारत पर चुनावी नतीजों के प्रभाव का सबसे तात्कालिक माध्यम बताया है। तेल की कीमतों में बदलाव का असर महंगाई, चालू खाते के घाटे, राजकोषीय घाटे और वित्तीय बाजारों पर पड़ता है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 8.7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। गुरुवार को भी कीमतों में नरमी जारी रही। रिपोर्ट दाखिल किए जाने के समय ब्रेंट क्रूड 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

हालांकि, रिपोर्ट ने चेताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का जोखिम तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में भारत की आर्थिक स्थिति पर पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों का असर बना रहेगा।

रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का खतरा बरकरार

व्यापार के मोर्चे पर रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने से भारत को तत्काल टैरिफ राहत मिलने की संभावना नहीं है। इसकी वजह यह है कि टैरिफ तय करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात करीब 90 अरब डॉलर रहा।

रिपोर्ट ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने के खतरे को भी बरकरार बताया है। लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के तहत 16 अक्टूबर को जारी छूट की कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं है और इसे कभी भी वापस लिया जा सकता है।

रुपये और विदेशी निवेश को मिल सकता है सहारा

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना से विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे रुपये और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को मामूली समर्थन मिल सकता है।

वहीं, एच-1बी वीजा नियमों और भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों पर चुनावी नतीजों का प्रभाव फिलहाल तटस्थ रहने का अनुमान है, क्योंकि ये मुद्दे मुख्य रूप से व्हाइट हाउस और अमेरिकी अदालतों के फैसलों से प्रभावित होते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई अमेरिकी कांग्रेस रूस से भारत की तेल और रक्षा खरीद पर अधिक निगरानी रख सकती है।



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