पीयूष गोयल की जर्मनी की 3 कंपनियों से बातचीत, भारत में निवेश और विनिर्माण पर जोर


बर्लिन/नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी के बर्लिन में फ्रेसेनियस ग्रुप (Fresenius Group), बायर (Bayer) और नॉफ ग्रुप (Knauf Group) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत में विनिर्माण का विस्तार करने, निवेश बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट के जरिए इन बैठकों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, मजबूत विनिर्माण क्षमता और बुनियादी ढांचे के विकास की जरूरतें जर्मन कंपनियों के लिए सहयोग के नए अवसर प्रदान करती हैं।

फ्रेसेनियस के साथ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा

फ्रेसेनियस ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल सेन के साथ बैठक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा समाधानों की बढ़ती मांग तथा भारत की विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाने के अवसरों पर जोर दिया गया।

चर्चा में भारत के कुशल कार्यबल और उत्पादन क्षमताओं के माध्यम से घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग पूरी करने की संभावनाएं भी शामिल रहीं।

बायर की निवेश और विस्तार योजनाओं पर बातचीत

पीयूष गोयल ने बायर के फार्मास्यूटिकल्स डिवीजन के अध्यक्ष स्टीफन ओएलरिख के साथ भी बैठक की। इस दौरान भारत में कंपनी की विस्तार योजनाओं, निवेश बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र के साथ सहयोग मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा हुई।

मंत्री ने भारत के मजबूत स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र में बायर की भागीदारी और संभावित कारोबारी अवसरों को विस्तार देने पर जोर दिया।

नॉफ ग्रुप के साथ टिकाऊ निर्माण सामग्री पर जोर

नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मूरत अकील्डिज के साथ बैठक में भारत में कंपनी की बढ़ती विनिर्माण उपस्थिति और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

इस बैठक में टिकाऊ निर्माण सामग्री और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े अवसर प्रमुख रहे। पीयूष गोयल ने भारत के तेजी से हो रहे शहरीकरण और आर्थिक बदलाव को देखते हुए इन क्षेत्रों में सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

भारत-जर्मनी औद्योगिक सहयोग को मिल सकता है बढ़ावा

तीनों कंपनियों के साथ हुई बैठकों में स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स, विनिर्माण, निवेश और टिकाऊ निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं सामने आईं। भारत की उत्पादन क्षमता और बढ़ती घरेलू मांग अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं।

हालांकि, इन चर्चाओं के संबंध में किसी नए निवेश समझौते या निश्चित निवेश राशि की घोषणा नहीं की गई। इन बैठकों का मुख्य फोकस भारत में कंपनियों की मौजूदगी बढ़ाने और भविष्य में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर रहा।