नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 : दूसरे दिन इतिहास, संस्कृति और विचारों का जीवंत संगम

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साहित्य Updated On :

नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के दूसरे दिन ठंड के बावजूद पुस्तक प्रेमियों का उत्साह देखते ही बना। मेले के विभिन्न हॉल में बड़ी संख्या में पाठकों, छात्रों, शिक्षकों और साहित्यकारों की उपस्थिति रही। विश्व के सबसे बड़े बी2सी पुस्तक मेलों में शामिल एनडीडब्ल्यूबीएफ का 53वां संस्करण संवाद, विचार-विमर्श और सांस्कृतिक गतिविधियों से सराबोर रहा।

पीएम युवा 3.0 के लेखकों से शिक्षामंत्री का संवाद

दूसरे दिन प्रधानमंत्री संग्रहालय में माननीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम युवा 3.0 के अंतर्गत चयनित 43 युवा लेखकों से संवाद किया। लेखकों ने अपनी आगामी पुस्तकों की पांडुलिपियों, विषयवस्तु और शोध से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की।

श्री प्रधान ने युवा लेखकों को मेंटोरशिप की छह माह की अवधि का सार्थक उपयोग करने की प्रेरणा दी और ऐसी पुस्तकें लिखने का आह्वान किया, जो भारतीय युवाओं को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने लेखकों को एनबीटी द्वारा भौतिक एवं डिजिटल संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराने तथा ‘वन नेशन–वन सब्सक्रिप्शन’ पहल के तहत शोध सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, एनबीटी निदेशक युवराज मलिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सैम मानेकशॉ और सगत सिंह की सैन्य विरासत पर विशेष सत्र

थीम पवेलियन ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा@75’ में दूसरे दिन की शुरुआत फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह को समर्पित सत्र “सैम और सगत” से हुई।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अता हसनैन और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज शुक्ला ने दोनों सेनानायकों के नेतृत्व, रणनीतिक सोच और सैन्य योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार दोनों के अलग व्यक्तित्व, लेकिन समान दूरदर्शिता ने भारत के निर्णायक सैन्य क्षणों को आकार दिया।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और प्रकाशन सहयोग

अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में कज़ाख़स्तान, इज़राइल, रूस और नेपाल के साहित्य को प्रस्तुत किया गया। पहली बार आयोजित भारत–जापान पब्लिशर्स मीट एंड ग्रीट में जापान के 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया, जिससे दोनों देशों के बीच प्रकाशन और साहित्यिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई।

पुस्तक विमोचन और प्रेरक सत्र

मेले में कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ, जिनमें संकट की खेती, When Branding Met Movies और Geopolitical Relations of the Princely State of Manipur with Neighbouring Regions शामिल हैं।
ऑथर्स कॉर्नर में आंतरिक विकास, नारी शक्ति और प्रेरणा से जुड़े सत्रों ने पाठकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

बाल पवेलियन और सांस्कृतिक संध्या

बाल पवेलियन में कठपुतली शो, कथाकथन, रचनात्मक कार्यशालाएं और बाल फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। शाम को एम्फीथिएटर में ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज की लाइव प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 10 से 18 जनवरी तक (निःशुल्क प्रवेश) भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ पाठकों को देश-विदेश के साहित्य, लेखकों और विचारों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।