दिल्ली तुर्कमान गेट पर पथराव के आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित, 8 आरोपी हुए हैं गिरफ्तार

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दिल्ली Updated On :

तीस हजारी कोर्ट ने तुर्कमान गेट स्थित फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई तोड़फोड़ और पथराव की घटना में गिरफ्तार तीन आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। एडिशनल सेशन जज भूपिंदर सिंह की अदालत ने मोहम्मद आरिब, मोहम्मद नावेद और मोहम्मद अथर की जमानत पर आदेश सुरक्षित रखते हुए बाकी पांच आरोपियों से जुड़े तर्क शुक्रवार को सुनने की बात कही है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील अतुल श्रीवास्तव ने सभी आठ आरोपियों की जमानत का विरोध करते हुए विस्तृत जवाब दाखिल किया। पुलिस का कहना है कि आरिब ने चैटर बॉक्स नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में तोड़फोड़ के वीडियो साझा कर लोगों को मौके पर जुटने के लिए उकसाया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में एक वीडियो भी चलाया, जिसमें कथित तौर पर आरिब लोगों को घटनास्थल पर आने की अपील करता सुनाई दे रहा है। पुलिस का दावा है कि आरिब ने खुद भी मौके पर वीडियो बनाए और बाद में गिरफ्तारी के समय उन्हें डिलीट कर दिया।

वहीं बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरिब ने सिर्फ मैसेज फॉरवर्ड किए थे और वह घटना के समय अपने कार्यस्थल पर मौजूद था, जिसका सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। अथर के वकील ने दलील दी कि वीडियो में उनके मुवक्किल का चेहरा साफ दिखाई नहीं देता और पुलिस ने सिर्फ कपड़ों के आधार पर पहचान की है। नावेद के वकील ने भी यही तर्क रखा कि उनके खिलाफ कोई ठोस भूमिका तय नहीं की गई है।

कोर्ट ने अभियोजन को चेतावनी दी कि वह लिखित जवाब से हटकर बिना सबूत मौखिक आरोप न लगाए। इससे पहले 24 जनवरी को इसी मामले में मोहम्मद उबैदुल्लाह को मानवीय आधार पर जमानत मिल चुकी है। यह मामला 6-7 जनवरी की रात को हुए उस घटनाक्रम से जुड़ा है, जब कथित अफवाहों के बाद 150-200 लोगों की भीड़ ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों पर पथराव किया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और अदालत में उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।



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