प्रेम एक एहसास है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है और इस एहसास में सिर्फ दिल काम करता है यहाँ दिमाग की कोई आवयश्कता नहीं होती। प्यार अनेक भावनाओं और विचारों का…
यहां पर हम गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी के रिश्ते की पड़ताल करते हैं। टैगोर और गांधी के विचार, व्यवहार और समझ में जमीन-आसमान का अंतर था। दोनों का यह रिश्ता बराबरी…
रेणु ने अपने आस-पास का जो दृश्य देखा, जो नंगी आंखों से दिखायी और कानों से सुनाई पड़ती थी और समाज के अंदर से निकलती उस आवाज को सुना जो आजादी के बाद…
भैरव प्रसाद को हम अक्सर एक संगठन कर्ता और संपादक रूप में ही याद करते हैं जबकि वे एक प्रतिबद्ध रचनाकार भी थे। हमें उनका आकलन एक प्रतिबद्ध रचनाकार के रूप में भी…
“फेयर शेयर फॉर चिल्ड्रेन” अभियान का मकसद बच्चों की आबादी के अनुपात के अनुसार बजट और संसाधनों आदि में उनकी उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित कराना है।
भारत जैसे बहुधर्मी देश में दो मतावलंबियों के बीच शादी शुरू से ही वैमनस्य का कारण रहा है। अंतरधार्मिक शादियों से सांप्रदायिक दंगा होने तक की संभावना बन जाती है। इस समय देश…
बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को उत्तर भारत में दलित चेतना के विकास और दलितों को राजनीतिक रूप से गोलबंद करने का श्रेय जाता है। उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहने वाली…
स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन (12 जनवरी) के अवसर पर ‘सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च आर्गेनाइजेशन’ ने ‘विश्व धर्म संवाद’ का आयोजन किया। विश्व धर्म संवाद में हिंदू, सिख, जैन, मुस्लिम, यहूदी और बहाई संप्रदाय…
4 जून 1891 को उनकी युवा संन्यासी विवेकानन्द से पहली बार मुलाकात हुई। इस पहली मुलाकात में ही अजीतसिंह उस युवा संन्यासी से इतने प्रभावित हुए कि राजा ने उस युवा संन्यासी को…
12 जुलाई 1909 को तत्कालीन पूर्वी बंगाल के ढाका जिला में पैदा होने वाले बिमल रॉय ने अपना फिल्मी करियर कैमरा असिस्टेंट से शुरू किया। बिमल रॉय इतालवी नव-यथार्थवादी सिनेमा से प्रेरित थे…
उत्तर भारत के लगभग हर आंदोलन और राजनीतिक जलसे में बल्ली सिंह चीमा की कविता ‘ले मशालें चल पड़े हैं, लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे, लोग मेरे गांव के’ और…
कहते हैं कि गुजरा हुआ समय फिर कभी वापस लौट कर नहीं आता। लेकिन हम अक्सर अपने कार्यों को कल पर टाल देते हैं और जब समय निकल जाता है तो अपनी असफलताओं…
सरकार प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत तो करती है लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है। समाधान निकले भी कैसे, सरकार की नजर में तो किसान गुमराह हैं और नए कृषि कानून से किसानों…
पार्टी में तय हुआ था कि ओली पूरे 5 साल के लिए बतौर प्रधानमंत्री देश और प्रचंड पार्टी को संभालेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही समय बाद ओली पर पार्टी के आदेशों…
शहद को अमृत तुल्य माना गया है। भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में शहद को औषधी माना गया है। कोरोना काल में शहद हर भारतीय के रसोई का अनिवार्य अंग बन गया। देश में…
नेपाल की राजनीति दो दशकों से संक्रमण के दौर से गुजर रही है। राजशाही की समाप्ति और माओवादी आंदोलन से निकले नेपाली राजनेताओं का मानना था कि भारत-नेपाल का संबंध दो ‘बड़े-छोटे’ भाईयों…
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि खानचंदानी को पुलिस की अपराध खुफिया इकाई (सीआईयू) ने यहां उनके आवास से गिरफ्तार किया है। अधिकारी ने कहा कि उन्हें रिमांड के लिए अदालत में…
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि अपने मंत्रियों के बयानों के लिए प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और किसानों की मांग स्वीकार करनी चाहिए।
सरकार कृषि कानून का विरोध करने वालों को किसान मानने से ही इनकार करती रही है। इस काम में स्वयं प्रधानमंत्री, उनका कैबिनेट, भाजपा शासित राज्य सरकारें, आरएसएस, भाजपा किसान मोर्चा से लेकर…
भारत का आम जनमानस भले ही बीएन राव के नाम से अपरिचित हो लेकिन अकादमिक जगत और विधि वेत्ताओं के लिए बीएन राव सुपरिचित नाम है। संविधान निर्माण में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है।…
हिन्दी और उर्दू के लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार मुंशी प्रेमचंद को हिंदी साहित्य में ‘कथा सम्राट’ के नाम से जाना जाता है। मुंशी प्रेमचंद हिन्दी पट्टी में साझा साहित्य-साझी विरासत के अप्रतिम मिसाल हैं।…
महात्मा गांधी रातों-रात नेता नहीं बने थे, न ही उन्होंने जल्दबाजी में कोई आंदोलन खड़ा किया। वे देश के कोने कोने और गली-कूंचों में फिरे, भारत के असली जनमानस से मिले, समझे। दरिद्रता,…
नई दिल्ली। साल भर में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आयी मोदी सरकार ने तो रोजगार के नए अवसरों के सृजन के लिये कुछ नहीं किया। दूसरी…
नई दिल्ली। स्वामी अग्निवेश जी, जिनका लीवर खराब होने के कारण आईएलबीएस अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की एक टीम ने अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है। अस्पताल के…
एक बीमार समाज जिसको स्वामी जी अपने युवावस्था में स्वस्थ करने का बीड़ा उठाया था वह उनके अंतिम समय में और बीमार हो चुका था। इस बीमार समाज ने कदम-कदम पर उनके राह…