हैदराबाद में AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने कहा कि वह शुरुआत से ही SIR का विरोध करते रहे हैं। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया की वजह से गरीब लोगों को पुराने दस्तावेज जुटाने और अपनी जानकारी साबित करने में परेशानी हो रही है।
ओवैसी ने खास तौर पर उन लोगों के बच्चों के भविष्य को लेकर सवाल उठाया, जिनके नाम अंतिम SIR मतदाता सूची में नहीं हैं। उन्होंने पूछा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है और बाद में उसके 18 साल के बेटे या बेटी को मतदाता के तौर पर अपना नाम जुड़वाना है तो वह पुराने परिवार के रिकॉर्ड से अपनी मैपिंग कैसे कराएगा। क्या वे नाराज फूफा की मदद से मैपिंग करेगा।
ओवैसी ने कहा कि वह शुरू से SIR के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को सही ठहराया है, लेकिन अब चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके फैसले किस प्रक्रिया और बहुमत के आधार पर लिए गए। उन्होंने कहा कि देश को यह बताया जाना चाहिए कि आयोग में महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से हुए या बहुमत के आधार पर। ओवैसी ने खास तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का जिक्र किया।
