चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत ने कहा है कि उन्होंने NALSAR हैदराबाद के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया है। इसलिए, वहां जाने का प्रश्न नहीं उठता। चीफ जस्टिस ने ऐसा उस सवाल के जवाब में कहा है जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या वह NALSAR के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। हालांकि, इसे औपचारिक रूप से निमंत्रण ठुकराना नहीं कह सकते, लेकिन यह साफ है कि चीफ जस्टिस ने NALSAR के निमंत्रण पर अभी तक अपनी सहमति नहीं दी है।
दरअसल NALSAR विवाद बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी NLSIU तक पहुंच गया, जिसके बाद सीजेआई सूर्यकांत ने मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया। अहम बात यह भी है कि NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत और BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर आपत्ति जताई थी।
नालसार के छात्रों ने यूनिवर्सिटी के आगामी दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित नहीं किए जाने की मांग को लेकर एक अभियान शुरू किया था। छात्र अदालती सुनवाई के दौरान सीजेआई की ओर से की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर भी विरोध जता रहे हैं।
बीसीआई ने इस मामले में नालसार के कुलपति से उन छात्रों और प्रदर्शन का समर्थन करने वाले लोगों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है, जिन्होंने सीजेआई के दीक्षांत समारोह में शामिल होने से जुड़े अभियान को शुरू करने, आयोजित करने या छात्रों को इसके लिए लामबंद करने में भूमिका निभाई।
बीसीआई के पत्र में कहा गया है कि परिषद ने इस मामले में तथ्यों की रिपोर्ट मांगी है और यह जांचने की जरूरत है कि क्या इसमें एडवोकेट्स एक्ट के तहत निर्धारित पेशेवर आचरण के मानकों का कोई उल्लंघन हुआ है।
