किसानों के प्रति मोदी सरकार की असलियत का दस्तावेज है पीयूष गोयल का बयान


कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि अपने मंत्रियों के बयानों के लिए प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और किसानों की मांग स्वीकार करनी चाहिए।


प्रदीप सिंह प्रदीप सिंह
देश Updated On :

नई दिल्ली। किसानों के आंदोलन पर मोदी सरकार और कांग्रेस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में लगे हैं। कांग्रेस किसानों के समर्थन तो भाजपा किसानों के विरोध में हैं। सरकार एक तरफ आंदोलनकारी किसानों से बातचीत करने का नाटक कर रही है तो दूसरी तरफ आंदोलन को बदनाम करने का षडयंत्र भी रच रही है।

लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन में कई राजनीतिक दल और संगठन घुसकर नेतृत्व संभालने की इच्छा रखते हैं। लेकिन किसान संगठनों ने पहले ही कह दिया है कि हम किसी राजनीतिक दल को इसके मंच पर नहीं चढ़ने देंगे। इसके बाद ही आंदोलन सरकार के साथ ही कई निहित स्वार्थी तत्वों के आंख की किरकिरी बना हुआ है।

अब देखिए ! सरकार को प्रदर्शनकारी किसानों की मांग से कोई चिंता नहीं है। लेकिन सरकार को यह डर है कि आंदोलन के मंच का दुरुपयोग हो सकता है। सरकार ने आंदोलनकारी किसानों से शुक्रवार को कहा कि वे अपने मंच का दुरुपयोग नहीं होने देने के लिए सतर्क रहें। साथ ही, कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं लेकिन कुछ ‘असामाजिक, वामपंथी और माओवादी’ तत्व आंदोलन का माहौल बिगाड़ने की साजिश कर रहे हैं।

केंद्र की तरफ से कहा गया कि  सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील है और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए उनके और उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रही है।

केंद्रीय  मंत्री नरेंद्र सिंह  तोमर ने ट्वीट किया, ‘‘किसानों की आपत्तियों का समाधान करने के लिए किसान संघों के पास एक प्रस्ताव भेजा गया है और सरकार इस पर आगे चर्चा के लिए तैयार है।’’

लेकिन सरकार की इस सदिच्छा के बाद  असली मंशा तब खुलकर सामने आयी जब  केंद्रीय खाद्य, रेलवे और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने आरोप लगाते हुए कहा कि “ऐसा लगता है जैसे कुछ माओवादी और वामपंथी तत्वों ने आंदोलन का नियंत्रण संभाल लिया है और किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने की जगह कुछ और एजेंडा चला रहे हैं।”


एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनता देख रही है, उसे पता है कि क्या चल रहा है, समझ रही है कि कैसे पूरे देश में वामपंथियों/माओवादियों को कोई समर्थन नहीं मिलने के बाद वे किसान आंदोलन को हाईजैक करके इस मंच का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करना चाहते हैं।’’

एक तरफ सरकार की तरफ से आंदोलनकारियों को असमाजिक तत्वों से सतर्क रहने को कहा जा रहा है दूसरी तरफ पीयूष गोयल आंदोलन में माओवादी तत्वों के घुसे होने की बात कह रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार आंदोलन में माओवादियों और वामपंथियों के शामिल होने का अफवाह फैला रही है।

कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन पर माओवादी तत्वों के कब्जा करने संबंधी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान को लेकर शनिवार को सरकार पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस सरकार में बैठे लोगों की नीति हर विरोधी को माओवादी और देशद्रोही घोषित करने की है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि अपने मंत्रियों के बयानों के लिए प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और किसानों की मांग स्वीकार करनी चाहिए।

सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी जी, लोकतंत्र में निरंकुशता का कोई स्थान नहीं। आप और आपके मंत्रियों की नीति हर विरोधी को माओवादी और देशद्रोही घोषित करने की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भीषण ठंड और बरसात में जायज़ माँगों के लिए धरने पर बैठे अन्नदाताओं से माफ़ी माँगिए और उनकी मांगें तत्काल पूरी करिए।’’

गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा कि किसानों की आड़ में कुछ ‘‘असामाजिक तत्व’’ उनके आंदोलन का माहौल बिगाड़ने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन कर रहे किसान संगठनों से ऐसे तत्वों को अपने मंच का दुरुपयोग नहीं करने देने की अपील की।

वहीं, रेल और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि प्रतीत होता है कि कुछ वामपंथी और माओवादी तत्वों ने आंदोलन पर ‘कब्जा’ कर लिया है और किसानों के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाए वे शायद कुछ और एजेंडा चला रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसान संगठनों से बातचीत में तोमर के साथ गोयल भी शामिल थे।

मोदी सरकार पूरे देश में किसानों के खुश होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की उपज खरीदने की बात कर रही है। लेकिन समूचे देश में किसानों के उपज का सही मूल्य नहीं मिल रहा है।