CJP के आंदोलन पर HC में सुनवाई- ‘छात्राओं के साथ छेड़छाड़, पुलिस पर FIR की मांग’

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20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने से संबंधित जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने सुनवाई की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। चार हफ्ते में जवाब मांगा। अगले चार हफ्ते में पुलिस के जवाब पर याचिकाकर्ता अपना (रिज्वाइंडर) जवाब दाखिल करेंगे। 11 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बॉडी कैमरा फुटेज और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने का आदेश दिया।

सोनम वांगचुक को जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने के पुलिस की कार्रवाई को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका पर भी दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आया। हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज किया।

याचिकाकर्ता की तरफ से वकील एन हरिहरन घटना के बारे में कोर्ट को अवगत कराया। हरिहरन ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था। कोई वॉर्निंग नहीं दी गई और लाठीचार्ज कर दिया गया। ऐसा तो कोलोनियल टाइम मे भी नहीं हुआ था। राज्य की कोई भी कार्रवाई, यदि होती है तो उसे आर्टिकल 14 के तहत मनमानी की कसौटी पर परखा जाएगा।

यह ऐसी स्थिति है जहां सबसे बड़े स्तर पर क्रूरता का प्रयोग किया गया है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि राज्य के पास आवाजाही को नियमित करने या आंदोलन को दिशा देने की क्षमता नहीं थी। उन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हुई। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, वकील विकास सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारी लगभग 20 दिनों से यही जुटे रहे। जबकि सोनम वांगचुक ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 20 तारीख को वे संसद की ओर मार्च करेंगे। यह बात सभी को पता थी। 20 तारीख तक कोई हिंसा नहीं हुई। विकास सिंह ने कहा कि उसी सभा पर हमला किया गया। हर परिवार के लड़के-लड़कियां वहां थे। वकील संजय हेगड़े का बेटा भी वहां था। सभी क्षेत्रों से बच्चे थे। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सभी वहां थे।

विकास सिंह ने कहा कि आज तक इस बात की कोई चर्चा तक नहीं है कि वहां एकत्रित लोगों ने हिंसा की हो। ऐसे वीडियो हैं जिनमें सादी वर्दी (सिविल कपड़ों) में लोग लाठियां लिए दिख रहे हैं और उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर उन प्रदर्शनकारियों पर हमला किया है। पुलिस किसी तरह से स्थिति को संभाल पा रही है।

एडवोकेड हरिहरन ने आगे कहा कि वहां लाठियां हैं, उनमें कीलें लगी हैं जिनसे बच्चों को पीटा गया। कम से कम पहचाने जा सकने वाले पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए। यह सब वीडियो में है। पूरी घटना की इंक्वायरी होनी चाहिए। 90 से ज़्यादा स्टूडेंट घायल हुए हैं। घायलों की संख्या बढ़ रही है। ऐसी सिचुएशन में लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी को क्या कोड ऑफ़ कंडक्ट बनाए रखना है इस बारे में कुछ डायरेक्शन पास किए जाने चाहिए। हम CCTV फुटेज, वीडियो, पुलिस के बल प्रयोग के निर्देश, आंसू गैस, डंडे वगैरह समेत सभी सामान को सुरक्षित रखने की भी मांग कर रहे हैं क्योंकि हम हाई लेवल जांच भी चाहते हैं।

केंद्र सरकार की तरफ से ASG एस वी राजू ने कहा कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें पुलिसकर्मी घायल दिख रहे हैं। तथाकथित शांतिपूर्ण आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं रहा। ऐसे प्रदर्शनों को दूसरे लोग हाईजैक कर लेते हैं। पुलिस की गाड़ियों को नुकसान हुआ। पुलिसवाले घायल हुए। FIR भी तब दर्ज की जाती है जब भीड़ बेकाबू हो जाती है। अगर हिंसा होती है तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है।



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