दिल्ली विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों का कैसा रहा प्रदर्शन?

पिछली दो बार की तरह इस बार भी कांग्रेस के हाथ खाली हैं। कांग्रेस के साथ-साथ मायावती, अजित पवार, असदुद्दीन ओवैसी, चिराग पासवान और नीतीश कुमार के दलों के भी हाथ कुछ नहीं लगा।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने बाज़ी मार ली है। 70 सीटों वाली इस विधानसभा में बीजेपी स्पष्ट बहुमत के लिए जरूरी सीटों (36) का आंकड़ा पार कर चुकी है। उसके खाते में 48 सीटें आती नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी के हाथ निराशा लगी है और वह 22 सीट पर सिमटती दिख रही है। इन सब के बीच पिछली दो बार की तरह इस बार भी कांग्रेस के हाथ खाली हैं। कांग्रेस के साथ-साथ मायावती, अजित पवार, असदुद्दीन ओवैसी, चिराग पासवान और नीतीश कुमार के दलों के भी हाथ कुछ नहीं लगा।

असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने दिल्ली विधानसभा में दो सीटों पर चुनाव लड़ा। उन्होंने ओखला विधानसभा सीट और मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से उम्मीदवार उतारे लेकिन इन दोनों सीटों पर उन्हें हार मिली। मुस्तफाबाद में उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही और ओखला में भी उनका उम्मीदवार बड़े अंतर से हार गया।

मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने तो इस चुनाव में 68 उम्मीदवार उतार दिए, लेकिन किसी भी सीट पर उनका उम्मीदवार तीसरे स्थान को भी हासिल नहीं कर पाया। बसपा को इस चुनाव में 0.60% से भी कम वोट मिले।

मायावती की ही तरह अजित पवार ने भी इस चुनाव में ढेर सारे उम्मीदवार उतारे थे लेकिन उनका हश्र और बुरा हुआ। उनके नेतृत्व वाली एनसीपी के कुल 30 उम्मीदवार चुनाव लड़े और सभी मिलकर महज 0.03% वोट हासिल कर सके।

भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली की 70 में से दो सीटें अपने गठबंधन दलों को भी दी थी। देवली विधानसभा सीट पर लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) के प्रत्याशी खड़े हुए थे। वहीं, बुराड़ी विधानसभा सीट पर जनता दल युनाइटेड (JDU) के प्रत्याशी मैदान में थे। देवली में चिराग के प्रत्याशी को 36,680 मतों से हार मिली। वहीं, बुराड़ी में जदयू प्रत्याशी 13 हजार से ज्यादा मतों से पीछे चल रहे हैं। इनके अलावा तीन कम्यूनिस्ट पार्टियां इस चुनाव में कुल मिलाकर 0. 02% वोट हासिल कर सकी। वहीं नोटा को 0. 6% वोट मिले।

First Published on: फ़रवरी 8, 2025 4:15 अपराह्न
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