भारत 5जी, 6जी में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिये निवेश कर रहा: पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत सेमी-कंडक्टर का मुख्य निर्माता बनने के लिए प्रयासरत है और 5जी व 6जी जैसी दूरसंचार प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिये निवेश कर रहा है।

ऑस्ट्रलिया द्वारा आयोजित ‘‘सिडनी संवाद’’ को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में डाटा सबसे महत्वपूर्ण है और भारत ने इसकी सुरक्षा एवं निजता की रक्षा के लिए मजबूत ढांचा विकसित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही भारत इसका इस्तेमाल लोगों के सशक्तिकरण के स्रोत के रूप में करता है। भारत को इसे लोकतांत्रिक ढांचें के अधीन और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करते हुए क्रियान्वित करने का बेजोड़ अनुभव भी है।’’

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर डिजिटल दुनिया के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों और उसकी वर्तमान प्राथमिकताओं का उल्लेख किया और कहा कि भारत के प्रति इस क्षेत्र को लेकर दुनिया का विश्वास हासिल हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम 5जी और 6जी जैसी दूरसंचार प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिये निवेश कर रहे हैं।’’

ऐसी जानकारी है कि नये युग की प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए भारत जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के संपर्क में है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम क्लाउड प्लेटफॉर्म्स और क्लाउड कंप्यूटिंग में मजबूत क्षमतायें विकसित कर रहे हैं। हम क्वांटम कम्प्यूटिंग में विश्व स्तरीय क्षमता निर्माण कर रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे अब नवोन्मेष और निवेश के मद्देनजर निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘साइबर सुरक्षा से जुड़े समाधान देने और दुनिया भर के उद्योग जगत को सेवा देने के मामले में भारत पहले से ही एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भारत को साइबर सुरक्षा का केंद्र बनाने के लिए हमने उद्योग जगत के साथ मिलकर एक कार्य बल का गठन भी किया है।’’

‘‘सिडनी संवाद उभरती एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित एक मंच है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘और अब हम, हार्डवेयर पर ध्यान दे रहे हैं। हम प्रेरक तत्त्वों का एक पैकेज तैयार कर रहें हैं ताकि सेमी-कंडक्टर के मुख्य निर्माता बन सकें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इलेक्ट्रॉनिकी और दूरसंचार में हमारा उत्पादन प्रेरक योजनाओं से जुड़ा है। भारत में अपना केंद्र बनाने के लिये ये क्षेत्र पहले से ही स्थानीय और विश्व भर में फैली कंपनियां और संस्थायें आकर्षित कर रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बौद्धिकता और मशीन-लर्निंग, खासतौर से मानव-केंद्रित तथा कृत्रिम बौद्धिकता के नैतिक उपयोग के क्षेत्र में भारत को अग्रणी देशों में बताया। साथ ही उन्होंने कोविन टीकाकरण मंच का उल्लेख किया और कहा कि इसे पूरी दुनिया के लिये सहज रूप से उपलब्ध करने की पेशकश भारत के मूल्यों तथा उसकी दृष्टि की मिसाल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जनकल्याण, समावेशी विकास और सामाजिक अधिकारिता के लिये प्रौद्योगिकी तथा नीति के उपयोग में भारत का अपार अनुभव है, जो विकासशील देशों के लिये बहुत सहायक हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, “हम देशों को और वहां के लोगों को शक्तिसम्पन्न बनाने में मिलकर काम कर सकते हैं तथा उन सबको इस सदी के अवसरों के लिये तैयार कर सकते हैं।”

सिडनी संवाद 17 से 19 नवंबर, 2021 तक आयोजित किया जा रहा है। यह ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की एक पहल है।

‘सिडनी संवाद’ के तहत राजनेताओं, उद्योग हस्तियों और सरकारी प्रमुखों को व्‍यापक चर्चाएं करने, नए विचार सृजित करने और उभरती एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न अवसरों एवं चुनौतियों की सामान्य समझ विकसित करने की दिशा में काम करने के लिए एक मंच पर लाने का प्रयास है।

First Published on: November 18, 2021 5:11 PM
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