पूरी दुनिया में जब कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई थी तो कुछ दिनों बाद यह खबर पूरी दुनिया में चली कि वैक्सीनेशन के मामले में इजरायल का प्रदर्शन सबसे बेहतर है। यह बात कही गई कि इजरायल ने सबसे तेज गति से अपने लोगों को वैक्सीन लगाने का काम किया है। लेकिन आज भारत जिस तरह से वैक्सीनेशन कर रहा है, उसके सामने इजरायल की उपलब्धि फीकी पड़ती दिख रही है।
इजरायल की आबादी तकरीबन 90 लाख है। इजरायल ने अपने 66 प्रतिशत लोगों को कम से कम वैक्सीन का एक डोज लगाने का काम किया है। भारत में अब तक 67.50 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगे हैं। देश के तकरीबन 55 फीसदी लोग ऐसे हैं जिन्हें वैक्सीन की कम से कम एक डोज लग गई है। इस नाते अगर देखें तो भारत इजरायल से पीछे दिखता है। लेकिन इजरायल के मुकाबले भारत की आबादी बहुत बड़ी है।
आज भारत में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान के मुकाबले अगर इजरायल की उपलब्धि काफी छोटी दिख रही है तो इसे समझने के लिए कुछ तथ्यों पर चर्चा प्रासंगिक है। इजरायल की कुल आबादी में से तकरीबन 30 प्रतिशत आबादी ऐसी है, जिसकी उम्र 18 साल से कम है। दूसरे शब्दों में कहें तो पूरे इजरायल में तकरीबन 63 लाख लोग ऐसे हैं, जिनके पास वैक्सीन लेने की पात्रता है।
वहीं अगर इजरायल में वैक्सीन लेने की पात्रता रखने वाले लोगों को वैक्सीन लगाने का काम भारत को करना हो तो भारत में जिस गति से हर दिन वैक्सीनेशन हो रहा है, उस हिसाब से दोपहर तीन बजे तक ही भारत यह काम कर लेगा। इजरायल में वैक्सीन लेने की पात्रता रखने वाली आबादी के बराबर लोगों को भारत हर दिन दोपहर तक ही वैक्सीन लगा दे रहा है। पिछले एक सप्ताह में भारत में हर दिन औसतन 84.55 लाख वैक्सीन डोज लगाए गए हैं।
भारत ने 31 अगस्त 1.33 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने का काम किया। अब अगर इजरायल में वैक्सीन लेने की पात्रता रखने वाले सभी लोगों की संख्या के मुकाबले इतने वैक्सीन डोज को रखा जाए तो यह पता चलता है कि 31 अगस्त को भारत ने जितने डोज लगाए, उतने डोज में इजरायल की पूरी आबादी को दो डोज वैक्सीन लगाकर उनका पूर्ण वैक्सीनेशन हो गया होता। इजरायल की पूरी आबादी का पूर्ण वैक्सीनेशन करने के बावजूद भारत के पास सात लाख से अधिक वैक्सीन डोज बच गए होते।
वैक्सीनेशन के मामले में भारत रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। कई विकसित और आर्थिक तौर पर काफी समृद्ध देशों के मुकाबले भारत का प्रदर्शन काफी बेहतर है। कोलंबिया, स्पेन, अर्जेंटीना, युगांडा, यूक्रेन, अल्जीरिया, सूडान, इराक, अफगानिस्तान, पोलैंड, कनाडा और मोरक्को जैसे 15 से अधिक ऐसे देश हैं, जिनकी पूरी आबादी को अलग—अलग करके भारत एक दिन में दोनों डोज लगाकर उन्हें पूरी तरह से वैक्सीनेटेड बना सकता है। पिछले एक सप्ताह में भारत हर दिन तकरीबन 85 लाख लोगों को वैक्सीन लगा रहा है। इन 15 देशों के पूर्ण वैक्सीनेशन के लिए अगर भारत अपने एक दिन के कुल वैक्सीन डोज का इस्तेमाल करेगा तो भी कुछ लाख वैक्सीन डोज भारत के पास बच जाएंगे।
वैक्सीनेशन की इतनी तेज रफ्तार की वजह पूछने पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताते हैं, ‘नए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर कार्यभार संभालते ही तुरंत स्पष्ट कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर हाल में यह चाहते हैं कि देश में तेज गति से वैक्सीनेशन हो।
वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्होंने वैक्सीन निर्माता कंपनियों से लगातार बातचीत की। उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव मदद देने का वादा किया। साथ ही उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों और स्वास्थ्य मंत्रियों को यह भरोसा दिलाया कि वैक्सीन आपूर्ति में कोई समस्या नहीं होगी। उन्हें कहा कि वैक्सीन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर वैक्सीनेशन की गति बढ़ाइए। इन सबका असर आज यह दिख रहा है कि भारत तकरीबन 85 लाख वैक्सीन लगा पा रहा है।’
उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले एक सप्ताह में दो दिन एक करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगाए। पहली बार 27 अगस्त को एक करोड़ वैक्सीन डोज का आंकड़ा पार करते हुए भारत ने 1.09 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाए। वहीं इसके चार दिन बाद 31 अगस्त को ही न सिर्फ यह रिकॉर्ड टूटा बल्कि 1.33 करोड़ वैक्सीन डोज लगाने का काम किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में यह रिकॉर्ड भी टूटेगा और इससे भी काफी बड़ी संख्या का रिकॉर्ड बनेगा।
