केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने परीक्षा सिस्टम में एक बड़ा बदलाव किया है।बोर्ड ने फैसला लिया है कि अगले साल से छात्रों को उनकी मूल्यांकित यानी चेक की गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मकसद है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।
अब तक छात्रों को सिर्फ मार्क्स और रिजल्ट ही मिलते थे, लेकिन कई बार बच्चों को यह समझ नहीं आता था कि उनकी कॉपी में नंबर कैसे दिए गए।इसी परेशानी को देखते हुए CBSE ने यह नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है।
इस पूरी सुविधा को DigiLocker से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह है कि छात्र अपने अकाउंट में लॉगिन करके सीधे अपनी चेक की गई आंसर शीट देख सकेंगे। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि छात्रों को अपने प्रदर्शन को समझने में भी आसानी होगी।
CBSE पहले से ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से होती है। अब इस सिस्टम को और बेहतर और मजबूत बनाने पर काम चल रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती या तकनीकी समस्या कम से कम हो।बोर्ड का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर काम करते समय कभी-कभी छोटी तकनीकी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उन्हें सुधारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
CBSE ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं। लगभग 20 उत्तर पुस्तिकाओं में मिलान से जुड़ी समस्याएं पाई गई थीं।हालांकि बोर्ड का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लगभग 9।8 मिलियन कॉपियों की जांच के दौरान ऐसी छोटी समस्याएं संभव हैं।
CBSE ने यह भी संकेत दिया है कि कॉपियों के पुनः मूल्यांकन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 1 जून से शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के नंबर सही तरीके से दिए गए हों और अगर किसी भी तरह की गलती हो तो उसे समय पर ठीक किया जा सके।यह कदम छात्रों को एक और मौका देगा ताकि वे अपने परिणाम को लेकर पूरी तरह संतुष्ट हो सकें।
CBSE का कहना है कि उसका लक्ष्य पूरा सिस्टम को और ज्यादा स्मूद, तेज और “ग्लिच-फ्री” बनाना है।आने वाले समय में डिजिटल मूल्यांकन को और मजबूत किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
