सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की दायर की गई याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है। जिसमें असम पुलिस की ओर दर्ज एक आपराधिक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़ा है। जस्टिस जे।के। महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस। चंदुरकर की पीठ 30 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा है।
खेड़ा के बचाव में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हिमंत बिस्वा सरमा के ‘पेड़ा बना दूंगा’ जैसे बयानों का हवाला दिया। सिंघवी ने कहा, ‘मामला आरोप की सच्चाई का नहीं है। मकसद साफ लगता है कि हिरासत में लेकर अपमानित किया जाएगा।’ सिंघवी ने एबीपी न्यूज को दिए हिमंत के उस इंटरव्यू का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने इस बात पर एतराज जताया है कि पुलिस ने खेड़ा को गुवाहाटी से जाने कैसे दिया और पुलिसवालों की जवाबदेही तय करने की बात कही है।
सिंघवी ने कहा कि ‘पूछताछ से कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसके लिए गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हाई कोर्ट ने कह दिया कि एक गैर राजनीतिक महिला पर दुर्भावना से आरोप लगाए। मैंने उनकी विदेशी संपत्ति की बात की क्योंकि यह उनके पति से जुड़ी है जो राजनीति में हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि मैंने पासपोर्ट वाली बात साबित नहीं की, लेकिन यह तो ट्रायल में साबित हो सकता है। खेड़ा जांच में सहयोग करने को तैयार हैं।’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ‘इनकी (पवन खेड़ा) प्रेस कांफ्रेंस का विजुअल देखिए। ज़ोरदार खुलासा, बंटी-बबली होंगे फरार जैसी बातें लिखी हैं। इसके बाद स्क्रीन पर नकली विदेशी संपत्तियों और नकली पासपोर्ट दिखाया जाता है। इनके खिलाफ दर्ज शिकायत को देखिए। शिकायतकर्ता ने बताया है कि आरोपी ने नकली कागजात तैयार कर उन्हें बदनाम किया। उन्हें एंटिगा का भी नागरिक बताया, जहां भगोड़े लोग जाते हैं।’
मेहता ने आगे कहा,’आरोपी को बिना हिरासत में लिए की गई जांच में उसके आरोप झूठे पाए गए हैं। अब आरोपी को हिरासत में लेकर यह जानना है कि यह फर्जी दस्तावेज किसने बनाए, किसने आरोपी को उन्हें दिया, दूसरे देश का नकली सील बनाया। यह सब गंभीर बातें हैं। इस फर्जीवाड़े के पीछे विदेशी सोर्स भी हो सकता है। यह मामला अग्रिम जमानत देने लायक नहीं है।’
उन्होंने कहा, ‘मजिस्ट्रेट कोर्ट और हाई कोर्ट ने इस बात को स्वीकार करते हुए अग्रिम जमानत से मना किया है। इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है। घटना के बाद से आरोपी फरार है। सिर्फ किसी गुप्त ठिकाने से वीडियो जारी कर रहा है, अगर जांच में सहयोग की इतनी भावना थी तो उसे ऐसा करना चाहिए था।’
यह विवाद उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भुयान सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, विदेशों में अघोषित लग्जरी संपत्तियां और शेल कंपनियों से संबंध हैं। गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी और मानहानि से जुड़े आरोप शामिल हैं। इस महीने की शुरुआत में असम पुलिस ने इस मामले में दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर छापेमारी की थी और हैदराबाद भी जांच के सिलसिले में गई थी।
