सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। सावित्रीबाई भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवियत्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।
आज से 171 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था कितनी सामाजिक मुश्किलों से खोला गया होगा। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो विरोधी लोग पत्थर मारते थे। रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फेंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं।
सबसे पहले पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्होंने महिलोओ के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया।
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है।
ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।
10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया। प्लेग महामारी में सावित्रीबाई प्लेग के मरीज़ों की सेवा करती थीं। एक प्लेग के छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी छूत लग गया। और इसी कारण से उनकी मृत्यु हुई।
ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से साल का तीसरा दिन देश और दुनिया में तमाम तरह की कई अहम घटनाओं का साक्षी रहा। इस दिन की सबसे अहम घटना यह रही कि 1993 को दुनिया की दो महाशक्तियां रूस और अमेरिका अपने-अपने परमाणु हथियारों के भंडार को आधा करने के लिए तैयार हो गईं।
देश दुनिया के इतिहास में तीन जनवरी की तारीख में दर्ज महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:
1831: देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले का जन्म।
1836 : मुंशी नवल किशोर का जन्म।
1880 : ‘इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ का पहला अंक बम्बई में प्रकाशित।
1938 : अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने पोलियो की बीमारी का इलाज ढूंढने के लिए एक फाउंडेशन की स्थापना की। रूजवेल्ड 1921 में इस बीमारी की चपेट में आए थे।
1959 : अलास्का को अमेरिका का 49वां राज्य घोषित किया गया।
1993: अमेरिका और रूस इस बात पर राजी हुए कि वे अपने-अपने परमाणु हथियारों के भंडार को आधा कर देंगे।
2001 : हिलेरी क्लिंटन ने न्यूयार्क के सीनेटर के तौर पर शपथ ग्रहण की। वह देश के इतिहास में पहली पूर्व प्रथम महिला हैं, जिन्होंने चुनावी विजय हासिल की।
2004 : मंगल के अन्वेषण के लिए निकला अंतरिक्ष यान रोवर स्पिरिट ग्रह के रासायनिक और भौतिक संयोजन के अध्ययन के लिए मंगल पर उतरा।
2004 : मिस्र की विमानन कंपनी फ्लैश एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान 604 के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सभी 148 लोग मारे गए।
2014 : अल कायदा के चरमपंथियों ने इराक के फालुजा में पुलिस मुख्यालय को नुकसान पहुंचाया और इलाके को अपने कब्जे में बताते हुए उसके एक स्वतंत्र क्षेत्र होने का ऐलान किया।
