नई दिल्ली। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि उनके पास बहुमत है और इस बात पर उनके विरोधियों को भी संदेह नहीं है। उनका दावा है कि हरियाणा में कथित तौर पर बंधक कांग्रेस विधायकों के एक छोटे गुट में से कुछ वापस आना चाहते हैं और समय आने पर यह साफ हो जाएगा।
राजस्थान में पिछले लगभग दो सप्ताह से जारी राजनीतिक संकट के बीच कांग्रेस
के वरिष्ठ नेताओं में एक तथा तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाल
रहे गहलोत ने दावा किया कि उनके पास
स्पष्ट बहुमत है और ‘‘इस पर उनके विरोधियों को भी कोई संदेह नहीं है।’’ कांग्रेस विधायकों के एक ‘छोटे गुट’ को राज्य के बाहर होटल में बाउंसरों व दूसरे राज्य की पुलिस के पहरे में बंधक बनाकर रखने का आरोप भाजपा पर लगाते हुए गहलोत ने कहा, ‘‘मुझे जानकारी मिली है कि विधायक वहां से निकलकर सरकार के साथ आना चाहते हैं और समय आने पर यह साफ हो जाएगा।’’
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष ने पायलट और 18 अन्य बागी विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया है जिसे उन्होंने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने इस मामले में यथास्थिति का आदेश देते हुए कहा कि बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता नोटिस मामले में फिलहाल कोई कार्यवाही नहीं की जाए।
उच्च न्यायालय का कोई भी आदेश उच्चतम न्यायालय में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दायर याचिका पर निर्णय के अधीन होगा। इस याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई की जा रही है। इस सवाल पर कि बहुमत साबित करने के लिए क्या वह विधानसभा का सत्र बुलाएंगे गहलोत ने कहा, वह इस पर समय की आवश्यकता के अनुरूप फैसला लेंगे।
एक सवाल के जवाब में गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट की वापसी उनके आगे के रुख, क्रियाकलाप व कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर निर्भर है। उनसे पूछा गया था कि यदि पायलट वापस आना चाहें तो उनकी कोई शर्त होगी। गहलोत इस सवाल को टाल गए कि पायलट की वापसी को लेकर राहुल गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनसे कोई बात की है। यह पूछने पर कि क्या राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा पायलट की वापसी चाहते हैं, गहलोत ने कहा, ‘‘इस संबध में पार्टी नेतृत्व ही सही जानकारी दे सकता है।’’
गहलोत ने हालांकि साफ साफ नहीं कहा पर उन्होंने यह स्पष्ट जरूर किया कि हाल ही में पायलट को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर निकम्मा व नाकारा बताने संबंधी उनके बयान पर उन्हें किसी तरह का अफसोस नहीं है और ऐसे शब्द मजबूरी में उन्हें कहने पड़े।
उन्होंने कहा, ‘‘मै इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता हूं। परंतु जिस तरह का घटनाक्रम हुआ है…संगठन चलाने में जिस तरह गुटों को खड़ा किया गया, सरकार गिराने का षडयंत्र किया गया, पार्टी अनुशासन तोड़ा गया एवं सामान्य गरिमा नहीं रखी गई उससे व्यथित होकर मुझे कुछ अप्रिय शब्द कहने पड़े।’’
भाजपा की ओर से कथित फोन टैपिंग और इसकी कानूनी वैधता को लेकर पूछे जा रहे सवाल का उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि वह इतना जरूर आश्वस्त करना चाहेंगे कि उनकी ‘‘सरकार में हर कार्यवाही कानून, नियम, तय प्रक्रियाओं एवं निष्पक्षता से ही होगी।’’
गहलोत ने कहा, इस मामले में सरकार की जांच एजेंसियों द्वारा जांच व कानून अनुरूप कार्यवाही प्रक्रियाधीन है और वह इस समय और कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। गहलोत ने एक बार फिर यह आरोप लगाया कि भाजपा का नेतृत्व उनकी सरकार गिराने की साजिश कर रहा है। यह कहे जाने पर कि भाजपा इसे कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई का परिणाम बता रही है, गहलोत ने कहा, क्या कोई यह मान सकता है कि इस घटनाक्रम में भाजपा का हाथ नहीं है। गहलोत ने सवाल किया ‘‘..आडियो टेप सामने आए हैं.. मेरे करीबियों पर आयकर व ईडी के छापे पड़ रहे हैं.. हरियाणा में पुलिस के पहरे में और भाजपा सरकार की मेजबानी में कांग्रेस के विधायक रखे गए हैं, यह सब क्या साबित करता है?’’
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के इस आरोप पर कि मुख्यमंत्री उन्हें पिछले लोकसभा चुनाव में जोधपुर संसदीय क्षेत्र से बेटे वैभव गहलोत के हारने की वजह से निशाना बना रहे हैं, अशोक गहलोत ने कहा, इस घटनाक्रम को बेवजह डेढ़ वर्ष पूर्व हुए चुनाव से जोड़ना किसी को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा ‘‘जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कानूनी जांच कर रही हैं…अंतत: जीत सत्य की ही होती है।’’ क्या उन्हें उम्मीद है कि विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए उन्हें भाजपा के कुछ विधायकों का समर्थन मिल सकता है, इस सवाल पर गहलोत का जवाब था कि 200 सदस्यीय विधानसभा में उनके पास कांग्रेस और सरकार को समर्थन दे रहे साथी विधायकों का बहुमत पहले से मौजूद है।
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