विदेशी मेहमानों का स्वागत, बना अपनों की आफत


किसी न किसी बहाने भारत आने वाले विदेशी मेहमानों के स्वागत सत्कार में भारत के लोगों को परदे में रहने देने या विदेशी मेहमानों से दूर रहने के लिए भारतवासियों पर पर्दा डालने की यह पहली घटना नहीं है। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है लेकिन पिछले 9 – 10 साल के दौरान इस तरह की घटनाओं में बहुत तेजी के साथ वृद्धि हुई है।


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नई दिल्ली। दिल्ली वालों सावधान ! अगले महीने की 9 और 10 तारीख यानी 9 और 10 सितंबर को भूल कर भी दिल्ली के प्रगति मैदान और आईटीओ के आस पास भूल कर भी न जाना । सरकार ने मुनादी कर दी है कि इन दो दिनों में सिर्फ इस इलाके के आस पास रहने वाले लोग तो अपना पहचान पत्र दिखा कर यहाँ से आ – जा सकते हैं लेकिन इसके अलावा और कोई इसके आस-पास फटक तक नहीं सकता।

इस बाबत जान लेने लायक जरूरी बात यह है कि दिल्ली में प्रगति मैदान के आस- पास रिहायशी इलाका है ही नहीं , लिहाजा इन दो दिनों में स्थानीय लोगों के पहचान पत्र लेकर भी प्रगति मैदान की तरफ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

सवाल यह भी है कि केंद्र सरकार के दिशा निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने इस तरह की मुनादी क्यों की है । सरकार की तरफ से इसकी जो वजह बताई गई है उसके मुताबिक इन दो दिनों के दौरान दिल्ली के प्रगति मैदान में बने नए कन्वेंशन हाल में जी- 20 सम्मेलन होना है इसलिए देश के नागरिकों का इस इलाके में प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।

स्थानीय लोगों का इस इलाके में 9 और 10 सितंबर को प्रवेश इसलिए भी वर्जित किया गया है ताकि विदेशी मेहमानों को किसी तरह की असुविधा न हो और देसी नागरिकों की हरकतों की वजह से भारत की दुनिया में बेवजह बदनामी न हो। किसी न किसी बहाने भारत आने वाले विदेशी मेहमानों के स्वागत सत्कार में भारत के लोगों को परदे में रहने देने या विदेशी मेहमानों से दूर रहने के लिए भारतवासियों पर पर्दा डालने की यह पहली घटना नहीं है। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है लेकिन पिछले 9 – 10 साल के दौरान इस तरह की घटनाओं में बहुत तेजी के साथ वृद्धि हुई है। 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले हुई अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा तो याद होगी ही । ट्रम्प की उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश गुजरात के अनेक शहरों की कई सड़कें कच्ची दीवारों के निर्माण से इस तरह ढक दी गयीं थीं ताकि भारत भ्रमण पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति सड़कों के दोनों तरफ बसी झुग्गी – झोपड़ी वाली मलिन बस्तियों का दीदार न कर सकें।

इसी तरह चीन के राष्ट्रपति और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री के भारत प्रवास के दौरान भी देश की राजधानी दिल्ली से लेकर गुजरात की राजधानी गांधीनगर, पड़ोसी शहर अहमदाबाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस का कलेवर भी कुछ दिनों के लिए ही सही पूरी तरह बदल देने की कोशिश जरूर की गई थी। भारत के शहरों को विदेशी मेहमानों की नजर से बचा कर रखने की ये कोशिशें कितनी कामयाब हुई यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन ढ़ाक के सिर्फ तीन पात की कहावत को चरितार्थ करते हुए हुआ वही जिसकी सबको उम्मीद थी। विदेशी मेहमानों के स्वदेश लौटने के साथ ही भारत के ये शहर अपनी पुरानी गरीबी ओढ़े हुए दिखाई दिए । जी – 20 समूह की बैठकों के लिए भारत की राजधानी ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों की राजधानियों और छोटे – बड़े शहरों का भी अस्थायी तौर पर काया कल्प किया जा रहा है। इस सम्मेलन के दिल्ली आयोजन को लेकर यह चर्चा है कि 9 और 10 सितंबर को प्रगति मैदान और इसके आस – पास का इलाका आम लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए बंद रहेगा।

इस दौरान इलाके के स्कूल, कॉलेज , बाजार , ऑफिस तथा अन्य संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे और इस इलाके से होकर दिल्ली के अन्य स्थानों में जाने वाले लोगों और उनके वाहनों को बाहर से प्रवेश दिया जाएगा। इस दौरान केवल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों को ही इस इलाके से आने – जाने की अनुमति होगी। आवश्यक सामान की आपूर्ति करने वाले ये वाहन भी वही होंगे जो आयोजन में शामिल होने वाले देसी – विदेशी मेहमानों के खान – पान की व्यवस्था में लगे होंगे या फिर ऐसे वाहन किसी न किसी रूप में आयोजन से जुड़े हुए होंगे। इस सम्मेलन के लिए 8 सितंबर को बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान दिल्ली पहुंचेंगे। इनके ठहरने की व्यवस्था दिल्ली के एक दर्जन से अधिक बड़े होटलों में की गई है। 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली इलाके में सुबह से रात तक विदेशी मेहमानों का आना – जाना लगा रहेगा। इसलिए इस दौरान दिल्ली वासियों के इस इलाके में आने – जाने पर अस्थायी बंदिश लगाई गई है।