नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स बैठक समाप्त हो गई। बैठक में विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए, जबकि सभी मुख्यमंत्रियों को इसमें आमंत्रित किया गया था। विपक्षी मुख्यमंत्रियों के बैठक में नहीं पहुंचने को लेकर कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।
हालांकि, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे। वहीं, BJP शासित छह राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में पहुंचे। उन्होंने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित रात्रिभोज में हिस्सा लिया।
रात्रिभोज में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हुईं।
इसके अलावा केरल के मुख्यमंत्री वी।डी। सतीशन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी।के। शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बैठक में नहीं पहुंचे।
विपक्षी दल इससे पहले भी कई अहम बैठकों से दूरी बना चुके हैं। जुलाई 2024 में नीति आयोग की नौवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का भी विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था।
कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ INDIA ब्लॉक के कुछ नेताओं ने भी उस बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इनमें केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, आम आदमी पार्टी शासित पंजाब और दिल्ली की सरकारें तथा उस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन शामिल थे। इन नेताओं ने केंद्रीय बजट को गैर-NDA शासित राज्यों के प्रति ‘भेदभावपूर्ण’ बताते हुए बैठक के बहिष्कार का फैसला किया था।
2023 में नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से आयोजित G20 डिनर में कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, INDIA ब्लॉक के कई अन्य नेता, जिनमें एमके स्टालिन भी शामिल थे, इस कार्यक्रम में पहुंचे थे।
कांग्रेस ने BRICS बैठक को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने बैठक की उपलब्धियों और जारी घोषणा-पत्र की आलोचना करते हुए कहा कि दोनों ही उम्मीदों से काफी कम रहे।
कांग्रेस ने कहा कि घोषणा में अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और यहां तक कि पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख नहीं किया गया। पार्टी के मुताबिक, इससे साफ है कि यह बैठक किसी तरह की जीत नहीं थी।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि चीन ने अरुणाचल और लद्दाख जैसे क्षेत्रों पर कब्जा किया हुआ है, ऐसे में प्रधानमंत्री को स्पष्ट शब्दों में चीन से इन क्षेत्रों से पीछे हटने की मांग करनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, भारत को इस शिखर सम्मेलन से मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा यही हो सकता था।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद और पहलगाम घटना की निंदा किए जाने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि घोषणा-पत्र में आतंकवाद और पहलगाम घटना की निंदा तो की गई है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि पहलगाम हमला किसने किया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घोषणा-पत्र में कहीं यह नहीं बताया गया कि दुनिया भर में आतंकवाद कौन फैला रहा है।
