पुस्तक मेला 2026 : रचनाओं में मानवता का संदेश जरूरी -नासिरा शर्मा

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साहित्य Updated On :

नई दिल्ली। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में साहित्य अकादेमी द्वारा प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज अकादेमी पुरस्कार प्राप्त दो लेखकों- मोहन सिंह (डोगरी) और रश्मि चौधरी (बोडो) ने पाठकों के साथ अपनी रचना प्रक्रिया साझा करने के साथ अपनी रचनाओं का पाठ भी किया। ‘कहानी-पाठ’ कार्यक्रम वरिष्ठ हिंदी कथाकार नासिरा शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ और उसमें – हरिसुमन बिष्ट और अवधेश श्रीवास्तव ने अपनी-अपनी कहानियों का पाठ किया।

हॉल नं.- 2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर आयोजित पहले कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ में प्रख्यात डोगरी कवि एवं नाटककार मोहन सिंह ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा कोई साहित्यिक बैकग्राउंड नहीं था। सिनेमा देखकर मेरा रंगमंच से लगाव हुआ। प्रख्यात डोगरी लेखक केहरि सिंह मधुकर के संपर्क में आने के बाद मैं सही मायनों में साहित्य से जुड़ा। उन्हें सुनकर बहुत कुछ सीखा और उन्होंने ही सिखाया कि कविता वो है जो अपने अंदर से फूटती है। मेरी रचना में आम लोगों के मसले होते हैं। आगे उन्होंने कहा कि लेखन को व्यवसाय समझना ग़लत होगा। यह केवल सामाजिक बदलाव के लिए प्रयुक्त होना चाहिए। उन्होंने अपनी नज़्में ‘घेरा‘, ‘श्राप‘, ‘माँ के मरने पर‘, ‘पोतियाँ ऐसी ही होती हैं‘, ‘साथ न छोड़ देना’, ‘पेड़ और आदमी‘ आदि प्रस्तुत कीं।

बोडो की प्रख्यात कवयित्री रश्मि चौधरी ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि मैं अपने वैवाहिक जीवन और बीमार पिता की परेशानियों को सहते हुए लेखन से जुड़ी। मैंने ग्रामीण महिलाओं के दुख, पीड़ा, नफ़रत, दयालुता आदि विषयों पर लेखन किया है। मेरी कविताएँ नारीवादी होती हैं। उन्होंने पहले अपनी कविता ‘दरबार‘ बोडो में प्रस्तुत की। शेष कविताएँ- ‘आँगन‘, ‘अकेली‘, ‘चिड़िया उड़ गई‘ और ‘जीवन‘ हिंदी में प्रस्तुत कीं।

कहानी-पाठ कार्यक्रम में अवधेश श्रीवास्तव ने ‘खेल खेल में‘ कहानी प्रस्तुत की, जिसमें बच्चों और कुत्ते के पिल्लों के आपस के प्यार को दर्शाया गया है। हरिसुमन बिष्ट ने ‘तुमने कुछ नहीं कहा था‘ कहानी प्रस्तुत की। यह कहानी गंदे नाले की समस्या पर होती राजनीति पर आधारित थी, जिसमें सही जन प्रतिनिधि के चुनाव की कसमकस को दिखाया गया है।

प्रख्यात लेखिका नासिरा शर्मा ने अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए कहा कि लेखक की यह परेशानी होती है कि वह किन मुद्दों को छोड़े और किन मुद्दों को उठाए। लेखक ज़िंदगी के बहुत नज़दीक से जुड़े मुद्दों को उठाता है। सियासत और मानवता की दृष्टि लेखक को अलग-अलग तरह से लिखने को मजबूर करती है और लेखक को इन दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए लिखना पड़ता है। लेकिन यह ज़रूरी है कि रचनाओं में मानवता के संदेश ज़रूर बचे रहें।

कार्यक्रम के आरंभ में साहित्य अकादेमी में संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने अतिथियों का अंगवस्त्र से अभिनंदन किया और उनका परिचय श्रोताओं से कराया।