रशियन अनुवाद कार्यशाला का उद्घाटन

नई दिल्ली। सृजनात्मक अनुवाद सभ्यता निर्माण का कार्य करता है इसीलिए उसकी कोई भौगोलिक सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती। यह बात साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी ने आज रशियन हाउस में अनुवाद कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कही। यह अनुवाद कार्यशाला रशियन भाषा से भारतीय भाषाओं में साहित्यिक अनुवाद को लेकर थी।

उद्घाटन वक्तव्य में डॉ. गुलाटी ने कहा कि पूरी विश्व सभ्यता कहानियों में यात्रा करती है और वह हम सब के बीच अनुवाद के द्वारा ही पहुँची हैं। भाषाएँ पूरे विश्व की यात्राएँ करती हैं। कालजयी साहित्य में प्रेम, न्याय, मानवता आदि सभी भाव होते हैं जो पूरी दुनिया की समस्याओं का हल खोजने में सहायक होते हैं। अनुवाद केवल शब्दों का नहीं होता, बल्कि शब्दों में सभ्यताओं के गहरे निशान होते हैं।

अनुवाद एक ऐसा पुल है जिस पर विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों के भाव हम तक पहुँचते हैं। इसलिए अनुवाद बहुत जिम्मेदारी का काम है क्योंकि अनुवादक कहीं-न-कहीं सभ्यता के प्रतिनिधि होते हैं। कृत्रिम बौद्धिकता (एआई) से मशीनी अनुवाद तो संभव है लेकिन साहित्य इन मशीनों से कहीं ऊपर है। आगे उन्होंने कहा कि रशियन साहित्य में गहरी मानवता है और उसे भारतीय भाषाओं में अनुवाद के द्वारा और अधिक संख्या में आना चाहिए। उन्होंने इसके लिए साहित्य अकादेमी से पूरे सहयोग का आश्वासन भी दिया।

इस अनुवाद कार्यशाला में प्रख्यात अनुवादिका रंजना सक्सेना, डॉ. बनर्जी और इस कार्यशाला की संयोजिका अनस्तासिया इल्यूशिना भी उपस्थित थीं। रंजना सक्सेना ने कहा कि अनुवाद द्वारा साहित्य नया जीवन पाता है इसलिए सृर्जनात्मक अनुवाद बेहद महत्त्वपूर्ण है। इस तरह की अनुवाद कार्यशालाएँ दो संस्कृतियों के बीच सद्भाव का निर्माण करती है। इस कार्यशाला में अनुवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसके परिणाम 5 जून, 2026 को घोषित किए जाएँगे।

First Published on: June 3, 2026 6:23 PM
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