अनामिका को हिंदी कविता संग्रह ‘टोकरी में दिगन्त : थेरीगाथा’ के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

अनामिका हिंदी कविता संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली वे देश की पहली महिला साहित्यकार बन गईं हैं। इसके साथ ही अनामिका हिंदी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली बिहार से तीसरी साहित्यकार भी हैं। इसके पहले यह पुरस्‍कार रामधारी सिंह दिनकर और अरुण कमल को मिला है।

हिन्दी कविता में जिन रचनाकारों ने स्त्री-रचनाशीलता को एक कोटि के तौर पर स्थापित किया, अनामिका उनमें अग्रणी हैं। ऐसा नहीं है कि हिन्दी में स्त्रियाँ इससे पहले कविताएँ नहीं रचती थीं, या उनकी कविताओं को जगह नहीं मिलती थी।

काव्य-रचना के क्षेत्र में अनेक स्त्रियों ने, अपनी सृजनशीलता से, अपना एक मुकाम बनाया था। लेकिन अनामिका की रचनाओं में स्त्रियां खुद बोलती नजर आती हैं, जो इनको अपने समकालीनों से जुदा करती थी। और इसी भिन्नता के कारण आज देश की जानी-मानी हिंदी साहित्यकार अनामिका को उनकी हिंदी कविता संग्रह ‘टोकरी में दिगन्त : थेरीगाथा’ के लिए साल 2020 साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है।

अनामिका हिंदी कविता संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली वे देश की पहली महिला कवयित्री बन गईं हैं। इसके साथ ही अनामिका हिंदी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली बिहार से तीसरी साहित्यकार भी हैं। इसके पहले यह पुरस्‍कार रामधारी सिंह दिनकर और अरुण कमल को मिला है।

अनामिका का जन्म 17 अगस्त 1961 को मुजफ्फरपुर में हुआ था। इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया। ये फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेजी की प्राध्यापिका हैं। अनामिका ने कविता के साथ उपन्यास व कहानियां भी लिखी हैं। इन्हें साहित्य का संस्कार परिवार से मिला था।

अनामिका का बचपन मुजफ्फरपुर में बीता। पिता पद्मश्री डॉ. श्यामनंदन किशोर मुजफ्फपुर स्थित बीआरए बिहार विश्‍वविद्याल के कुलपति रहे हैं। मां आशा किशोर हिंदी की प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष रहीं। भाई महाराष्ट्र कैडर में आइएएस अधिकारी रहे। अनामिका ने हिंदी कविता के अलावा उपन्यास व कहानियां भी लिखीं हैं। उन्‍होंने कई अनुवाद भी किए हैं।

अनामिका को हिंदी के सेवा में उनके योगदान के लिए पहले भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें हिंदी कविता में योगदान के लिए साहित्य अकादमी से पहले राजभाषा परिषद् पुरस्कार, साहित्य सम्मान, भारतभूषण अग्रवाल एवं केदार सम्मान आदि मिल चुके हैं।

साहित्य अकादेमी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस बार यह 20 भाषाओं के लिए पुरस्कार की घोषणा की गई है। अकादेमी ने कहा है कि मलयालम, नेपाली, ओड़िआ और राजस्थानी भाषा में पुरस्कार बाद में घोषित किए जाएंगे। अकादेमी ने पुरस्कार देने के लिए 7 कविता-संग्रह, 4 उपन्यास, 5 कहानी-संग्रह, 2 नाटक, 1 संस्मरण और 1 महाकाव्य का चयन किया है।

First Published on: March 13, 2021 11:52 AM
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