पटना। पटना साहिब की पावन धरा पर “श्री गुरु तेग बहादुर जी: जीवन एवं शिक्षाएं” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली तथा तख्त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। यह आयोजन गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अंग है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार विधान परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. रामवचन राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने की। इस अवसर पर तख्त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह, सरदार जगजोत सिंह सोही, सरदार इंदरजीत सिंह, सरदार गुरिंदर सिंह, सरदार हरबंस सिंह खनूजा तथा सरदार लखविंदर सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रो. रवेल सिंह (पूर्व सचिव, पंजाबी अकादमी,दिल्ली) भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जो ज्ञान, सत्य और आशा का प्रतीक है, तत्पश्चात अतिथियों का सम्मान किया गया। अपने संबोधन में माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और शिक्षाओं को अत्यंत प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनकी शहादत मानवाधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य के प्रति अटूट निष्ठा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन को साहस, सहिष्णुता और त्याग का अद्वितीय प्रतीक बताते हुए इसकी समकालीन प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सिख धर्म के सिद्धांतों के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है और सिख समुदाय से उनके विशेष संबंध रहे हैं।
बिहार विधान परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, ने अपने वक्तव्य में गुरु तेग बहादुर जी के जीवन तथा बिहार की इस पवित्र भूमि के साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरसे पर प्रकाश डाला, जबकि साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने स्वागत भाषण में साहित्य अकादेमी की इस पहल को गुरु साहिब की शिक्षाओं के व्यापक प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. रवेल सिंह ने बीज व्याख्यान दिया । उद्घाटन सत्र का संचालन प्रो. हरप्रीत कौर, प्राचार्या, माता सुंदरी कॉलेज फॉर वुमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें लखबिंदर सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष ,तख्त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
यह संगोष्ठी न केवल एक अकादमिक विमर्श का मंच बनी, बल्कि गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों-सत्य, त्याग और मानवता-को पुनः स्मरण करने का प्रेरणादायी अवसर भी सिद्ध हुई।
दो दिवसीय इस संगोष्ठी के दौरान देशभर से आए अनेक प्रख्यात साहित्यकार, विद्वान एवं शोधकर्ता अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे, जिनमें गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, दर्शन और शिक्षाओं के विविध आयामों पर गहन विमर्श किया जाएगा।
