सत्य निकेतन हादसा: कोई रास्ता नहीं था, सांस लेना भी मुश्किल…

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दिल्ली Updated On :

दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने का हादसा इतना खौफनाक था कि चंद सेकंड में पूरा मंजर बदल गया। हादसे में बाल-बाल बचे पान की दुकान चलाने वाले सुनील ने उस खौफनाक दोपहर का आंखों देखा हाल सुनाया। सुनील के मुताबिक, हादसा करीब दोपहर 1:30 बजे हुआ था।

सुनील ने बताया कि वह दुकान के अंदर बैठे थे और एक ग्राहक बाहर खड़ा था। तभी सामने वाली बिल्डिंग की तरफ से धूल का गुबार उठता दिखाई दिया। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो बिल्डिंग नीचे की तरफ धंस रही थी और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग आगे की ओर गिर गई। मलबा उनकी दुकान पर आ गिरा और वह अंदर ही फंस गए।

दुकान में फंस गए सुनील, सांस लेना भी मुश्किल था

सुनील के मुताबिक, मलबा गिरने के बाद दुकान बाहर से पूरी तरह बंद हो गई। अंदर धूल भर गई और सांस लेना भी मुश्किल हो गया। उन्होंने शटर नीचे किया और फिर उसके ऊपर से निकलने की कोशिश की। सुनील के मुताबिक, दुकान से बाहर निकलने में उन्हें करीब आधा घंटा लगा।

उन्होंने बताया कि दुकान में करंट भी फैल गया था। ऐसे में बाहर निकलना और मुश्किल हो गया। आखिरकार डंडों की मदद से शटर तोड़ा और किसी तरह दुकान से बाहर निकले।

फोन मलबे में दबा, दूसरे के फोन से पत्नी को दी खबर

सुनील ने बताया कि उनका फोन भी मलबे में दब गया था। इसके बाद उन्होंने किसी दूसरे व्यक्ति के फोन से अपनी पत्नी को कॉल किया और कपड़े लेकर आने को कहा, क्योंकि हादसे में उनके कपड़े खराब हो गए थे।

सुनील के मुताबिक, हादसे के बाद पूरी रात उनकी आंखों के सामने वही मंजर घूमता रहा। बिल्डिंग में रहने वाले कई बच्चों से उनकी पहचान थी। उन्होंने कहा कि वह खुद एक पिता हैं और बच्चों का दर्द समझ सकते हैं।

छुट्टी की वजह से कम बच्चे होने की बात कही

सुनील के मुताबिक, हादसे के दिन छुट्टी थी और लगातार तीन दिन की छुट्टी होने की वजह से बिल्डिंग में आम दिनों के मुकाबले कम बच्चे मौजूद थे। उनके अनुमान के मुताबिक, उस वक्त करीब 14-15 बच्चे वहां थे। उन्होंने उस बच्चे का भी जिक्र किया जिसने हादसे का वीडियो भेजा था। उसका नाम अंकित बताया गया। सुनील के मुताबिक, अंकित हादसे में बच गया था और वह रोज उनकी दुकान पर आता था।

अंकित ने बताया- पहले बेसमेंट, फिर ऊपर की मंजिलें धंसीं

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अंकित ने बताया कि जब वह वहां पहुंचा तो चारों तरफ धूल ही धूल थी। उसे मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले बेसमेंट, फिर ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर नीचे की तरफ धंसे। इसके बाद ऊपर की मंजिलें आगे की ओर गिर गईं।

अंकित ने बताया कि बिल्डिंग के सामने एक कार खड़ी थी, इसलिए मलबा ज्यादा दूर तक नहीं गया। उसने दुकान के बाहर एक व्यक्ति को मलबे में फंसा हुआ भी देखा। अंकित के मुताबिक, हादसे के करीब आधे घंटे से पौन घंटे के भीतर मंदिर के पास से एक मजदूर को भी मलबे से बाहर निकाला गया था। उसका पैर मलबे में फंसा था, जबकि शरीर का ऊपरी हिस्सा बाहर था।

दूसरी बिल्डिंग को लेकर भी जताई गई थी चिंता

रेस्क्यू में जुटे कुलजीत ने बताया कि वह दिल्ली पुलिस और एनडीआरएफ के साथ राहत-बचाव में लगे थे। उनके मुताबिक, उन्हें बताया गया कि शॉप नंबर-14 की गिरी हुई बिल्डिंग नीचे से शॉप नंबर-13 की बिल्डिंग को सपोर्ट दे रही थी। ऐसे में मलबा हटाने के दौरान शॉप नंबर-13 की बिल्डिंग को लेकर भी खतरा बताया गया था।

हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान पूरा हो चुका है। इस पूरी घटना ने सत्य निकेतन में रहने वाले छात्रों और स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे का मंजर इतना भयावह था कि उसे देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए।



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