नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिनांक 23 मार्च 2026 को गुरु शिष्य परम्परा स्कीम के वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए जारी मिनट्स में काफ़ी विसंगतियां हैं जिनसे देश के सक्रिय रंगकर्म पर ग्रहण सा लग गया है..जहां संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित गुरु शिष्य परम्परा स्कीम के सत्र 2025-26 की समाप्ति के समय संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी मिनट्स में बीते सत्र 2024-25 एवं 2025-26 के अनुदान हेतु किए गए सैकड़ों आवेदनों को बिना कोई कारण बताए निरस्त / कूल्डऑफ़ कर दिया गया है।
ऐसा देशभर की करीब 70 प्रतिशत से अधिक सक्रिय संस्थाओं के साथ हुआ है, जोकि मंत्रालय द्वारा स्कीम के अंतर्गत चाही गई अहर्ताएं पूरी करती हैं। इस सम्बन्ध देशभर की 1100 से अधिक सक्रिय कला मंडलियों के रंगकर्मी अनुदान असंगत एवं अकारण बंद किये जाने के विरोध में दिल्ली में जुटे।
इन रंगकर्मियों ने विसंगतियों वाले कुछ विशेष बिन्दुओं पर संस्कृति मंत्रालय को तुरन्त संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ये बिंदु निम्न हैं:
- यह अनुदान नाटक , नृत्य एवं संगीत तीन विधाओं को सीधे प्रभावित करता है किन्तु पूर्व के वर्षों की भांति इस वर्ष इन विधाओं के विषय-विशेषज्ञ ( जोकि अलग अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व करते थे ) सम्पूर्ण चयन / अचयन की प्रक्रिया में शामिल नहीं किये गए।
- पूर्व के वर्षों में अनुदान का आवेदन करने वाली संस्थाओं के गुरुओं / प्रतिनिधियों को विशेषज्ञों के समक्ष भौतिक रूप से प्रस्तुत होना अनिवार्य था। इस प्रक्रिया में अनुदान की पात्रता सिर्फ कागज़ आधारित न होकर सीधे भौतिक सत्यापन से स्वतः जुड़ जाती थी। जिसे इस वर्ष संस्कृति मंत्रालय ने नहीं अपनाया ,और सीधे ऑनलाइन आवेदनों पर एक तरफ़ा विचार किया। ऐसा करना एक पारदर्शी और तार्किक प्रक्रिया के स्थान पर अपारदर्शी और अतार्किक प्रक्रिया को वरीयता देने जैसा कदम है।
- संस्थाओं के भौतिक सत्यापन की व्यवस्था प्रति चार वर्ष में इस योजना में शामिल है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही कुछ संस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया गया , इस सत्यापन में अमुक संस्था को अनुदान जारी रखने हेतु पात्र पाया गया किन्तु इसी सत्र के लिए उनके रिनुअल आवेदन को कमेटी द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया। यहाँ मंत्रालय द्वारा अपने ही बनाये नियमों का अतिक्रमण कर अनेक संस्थाओं को योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। उनके भौतिक सत्यापन प्रतिनिधि और चयन समिति द्वारा लिए गये दोनों निर्णय आपस में विरोधाभासी हैं।
- पूर्व के वर्षों में अनुदान चयन समिति की बैठक के पूर्व कला मंडलियों को ई मेल अथवा नोटिफिकेशन के माध्यम से किसी दस्तावेज़ी कमी को यथासमय ठीक करने की पूर्व सूचना या अवसर दिया जाता था जोकि इस वर्ष नहीं किया गया। महोदय, इस योजना के 70 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी दूर दराज , ग्रामीण या कस्बाई इलाकों से जुड़े कलाकार हैं। और कलाकार अपनी कलाओं के प्रदर्शन में तो पूर्ण दक्ष हो सकता है किन्तु मंत्रालय की योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में वह अपेक्षाकृत कमज़ोर होता है। ऐसे में चयन समिति की बैठक के पूर्व कागज़ी त्रुटि सुधार का कोई अवसर न देना प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध और असंवेदनशील कदम है।
- दिनांक 23 मार्च 2026 को जारी मिनट्स में अनेक संस्थाओं के कार्यक्षेत्र कॉलम में बड़ी मात्रा में गड़बड़ियाँ हैं। उदाहरण के लिए नाट्य संस्थाओं के कार्यक्षेत्र के आगे लोकनृत्य / शास्त्रीय नृत्य / सुगम संगीत लिखा गया है। जुलाई 2025 में सम्पन्न मीटिंग का मिनट्स 8 माह आने पर भी इतनी बड़ी मात्रा में गड़बड़ी टाइपोएरर नहीं हो सकती। यह स्पष्ट रूप से गंभीर लापरवाही का संकेत है।
- इस चयन समिति ने संस्कृति मंत्रालय के अपने ही बनाये नियमों , मापदंडों एवं आधारों को दरकिनार करते हुए निर्णय लिए हैं। एक जैसी अहर्ताएं पूरी करने के बावजूद किसी संस्था को एप्रूव, किसी को एप्रूव बट कूल्ड ऑफ़ और किसी को रिजेक्ट कैटेगरी में रखा गया है। तथा चयन समिति द्वारा ऐसे निर्णय के पक्ष में कोई रिमार्क नहीं दर्ज किया गया है। ऐसा करना उनके भेदभावपूर्ण बर्ताव को दिखाता है।
- विषय-विशेषज्ञों के आभाव में बनाई गई समिति द्वारा देशभर से प्राप्त वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए फ्रेश कैटेगरी में प्राप्त 621 आवेदनों में से 470 निरस्त एवं रिनुअल कैटेगरी सक्रिय संस्थाओं से प्राप्त कुल 1750 आवेदनों में 320 कला मंडलियों के अनुदान को कूल्ड ऑफ़ ,844 आवेदनों को सीधा निरस्त कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए फ्रेश कैटेगरी में प्राप्त कुल आवेदन 296 में से 255 को रिजेक्ट , रिनुअल कैटेगरी में प्राप्त कुल 1996 आवेदनों में से 315 कूल्ड ऑफ़ , 711 रिजेक्टेड श्रेणी में हैं। इस प्रकार दोनों सत्रों के लिए सक्रिय संस्थाओं द्वारा प्राप्त कुल आवेदनों में तकरीबन 70 प्रतिशत संस्थाओं को इस योजना के लाभ से वंचित किया गया है जोकि मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी अपने ही नोटिफिकेशन के विरुद्ध है। नोटिफिकेशन के माध्यम से मंत्रालय कहता है कि नई संस्थाओं को योजना का लाभ देने के लिए पुरानी संस्थाओं में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की कटौती संभव होगी। किन्तु नई संस्थाओं के 50 प्रतिशत आवेदन निरस्त करने के बाद भी पुरानी और सक्रिय संस्थाओं में 70 प्रतिशत की कटौती असंगत प्रतीत होती है।
- इस सम्पूर्ण चयन प्रक्रिया में पूर्व के वर्षों की भांति संतुलन का ध्यान भी नहीं रखा गया है। मसलन सुदूर क्षेत्रों में यदि एक या दो समूह ही सक्रिय थे तो उनका भी अनुदान बंद कर दिया गया है। इसके विपरीत स्थापित नगरों और महानगरों में औसतन 15-20 संस्थाओं को अनुदान जारी रहेगा। जिन राज्यों में अधिक संस्थाएं हैं वहां भी कटौती की गई और जिन राज्यों में कम संस्थाएं हैं वहां भी बड़ी संख्या में कटौती हुई है। सुदूर अंचलों में कार्यरत कला साधकों को अपात्र मानने का कोई कारण मिनट्स में नहीं लिखा गया है।
- एक कलामंडली में औसतन 15-20 कलाकार हैं। इस तरह इन सक्रिय 1164 मंडलियों से करीब 16-22 हज़ार कलाकार सम्बद्ध हैं। 1164 संस्थाओं के समग्र अवदान को देखा जाय तो इनके द्वारा द्वारा एक वर्ष में किये जाने वाले आयोजनों / कार्यक्रमों / प्रदर्शनों / सेमिनार एवं कार्यशालाओं / बाल प्रशिक्षण शिविरों से न्यूनतम 50 लाख वयस्क एवं 10 लाख बच्चे देशभर में प्रभावित होते हैं। इनमें से कई संस्थाएं अनुसूचित जातियों , जनजातियों, स्लम एरिया और दिव्यांग बच्चों के साथ प्रतिवर्ष कार्य करती हैं। इस कार्य से इन समुदायों के बच्चों को बड़ी संख्या के व्यक्तित्व विकास , और बेहतर नागरिक बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही अनेक संस्थाएं कैदियों, किन्नरों ,बौनों ,पीड़ित महिलाओं के साथ कला के माध्यम से चेतना विस्तार और राष्ट्र निर्माण का कार्य करती हैं। रिजेक्ट हुई सभी संस्थाओं ने औसतन अपने 10 वर्षों की सक्रियता से कम से कम 6 करोड़ से अधिक वयस्कों और बच्चों को प्रभावित किया है। यह ऐसे में यह रिजेक्शन देश की सांस्कृतिक चेतना , कला विकास , नागरिक निर्माण में कला मंडलियों बड़ी भूमिका को अस्वीकार करने जैसा है।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के अनुदान हेतु अपनाई गई यह सम्पूर्ण प्रक्रिया संदेह , लापरवाही एवं अनिश्चितताओं से भरी है। देश की 70-80 प्रतिशत सक्रिय मंडलियों का अनुदान रोका जाना एवं नई मंडलियों के 60-80 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट होना असामान्य है। इससे वह मंडलियाँ और कलाकार भी स्वयं को अनिश्चितता में डूबा हुआ पा रहे हैं ,जिन्हें इस मिनट्स में स्वीकार / चयनित किया गया है। उन्हें यह शंका हो रही है कि संभवतः अगले वर्ष भी कटौती इसी भयावह रूप में होगी और हमारा आवेदन भी निरस्त हो सकता है। चिंता , अवसाद और अनिश्चितता में डूबा हुआ कलाकार कभी भी रचनाशील नहीं रह सकता। यह निर्णय उन स्वीकार की गईं कला मंडलियों को भी शंका और अनिश्चितता में धकेलता है।
बता दें कि रिनुअल के अधिकतम आवेदन उन संस्थाओं के होते हैं जोकि वर्षों से अपने अपने अंचलों में कला विकास का कार्य कर रही हैं ऐसे में एक ही वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल आवेदन का 70-80 प्रतिशत से अधिक निरस्त हो जाना सामान्य घटना नहीं है। यह निर्णय देश के सांस्कृतिक आन्दोलन को आघात पंहुचाने वाला है। इससे देश की नाट्य, नृत्य, संगीत एवं लोक कलाएं और उनके साधक एक बड़े संकट में आ जायेंगे। साथ ही यह निर्णय सम्बन्धित वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद लिया गया है और संस्थाएं / मंडलियाँ मंत्रालय की अहर्ताओं के अनुरूप कार्य कर चुकी हैं।
मंडलियों से जुड़े गुरुओं और शिष्यों ने अपनी सेवाएं बीते वर्षों में इस प्रत्याशा के साथ दीं कि मंत्रालय द्वारा देर-सवेर अनुदान प्राप्त हो जायेगा। किन्तु इस निर्णय से वह सभी कलाकार आहत एवं ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। साथ ही कला मंडलियों के आगामी कार्यक्रम, प्रशिक्षण, प्रदर्शन-प्रस्तुति , सेमिनार , इत्यादि कार्य बाधित होंगे।
भारत जैसे कला-संस्कृति प्रधान देश में सम्बन्धित मंत्रालय द्वारा ऐसा निर्णय लिया जाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है| गुरु-शिष्य परम्परा के अंतर्गत कलाएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होती हैं। इस योजना के अस्तित्व में आने के बाद भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य को विस्तार मिला है। समाज द्वारा हेय की दृष्टि से देखी जाने वाली कलाओं का गौरवकाल लौटा है।
ऐसे समय में जब विश्व भरतमुनि के नाट्य शास्त्र को सम्मान दे रहा है, उसी समय एकसाथ 1164 प्रदर्शनकारी मंडलियों के अनुदान को रोक देना भारतीय कला विकास को पुनः वर्षों पीछे ले जा सकता है। कलाओं के प्रशिक्षण इस तरह रुक जाने से निकट भविष्य में भारत में कलाओं और कला साधकों का एक विराट शून्य खड़ा हो सकता है।
इस संकट के क्षण में हमारी संस्था और देश भर के रंगकर्मी , नृत्य एवं संगीत साधक आपकी तरफ आशा भरी दृष्टि से देख रहे हैं। आप एक संवेदनशील और कलाप्रिय व्यक्तित्व हैं।
उक्त बिंदुओं को सामने रखते हुए देश भर से जुटे सैकड़ों रंगकर्मियों ने संस्कृति मंत्रालय से न्याय की उम्मीद जताई है कि मंत्रालय तुरन्त हस्तक्षेप करने का निवेदन करते हुए कहा है कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिनांक 23 मार्च 2026 को गुरु शिष्य परम्परा स्कीम के वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए जारी अनुदान मिनट्स पर रोक लगवाने एवं विषय-विशेषज्ञों के नेतृत्व में चयन समिति का पुनर्गठन तथा सम्पूर्ण आवेदनों के पुनर्मूल्यांकन करे।
