धार भोजशाला : हाई कोर्ट ने विवादित स्थल को मंदिर माना

धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने विवादित स्थल को मंदिर माना है और कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार है। 12 मई को हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत के फैसले पर शहर काजी वकार सादिक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि हम कोर्ट के फैसले को पढ़ेंगे और समझेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा।

धार भोजशाला पर फैसले के लिए शुक्रवार को हाई कोर्ट की बेंच बैठी। जज ने कहा कि हम सभी वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने कोर्ट की सहायता की। कोर्ट ने कहा, ”हमने तथ्यों को देखा, ASI एक्ट को देखा। आर्कियोलॉजी एक विज्ञान है। उसके आधार पर मिले निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है। साथ ही संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को भी देखा जाना है। यह परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। देवी सरस्वती का मंदिर था।”

धार भोजशाला पर हाई कोर्ट का आदेश

यह मंदिर है हिंदुओं को पूजा का अधिकार है। सरकार और ASI वहां संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था बनाने पर भी विचार करे।
जहां तक वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने और मंदिर में स्थापित करने का सवाल है, केंद्र सरकार उस पर विचार करे।
मुस्लिम पक्ष सरकार को मस्ज़िद के लिए जगह देने के लिए आवेदन दे सकता है। मस्जिद ऐसी जगह पर हो, जिससे दोनों पक्षों में विवाद न हो।

हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि 2003 के ASI के उस आदेश को निरस्त किया जाता है जिसमें मुस्लिमों को वहां नमाज़ की अनुमति दी गई थी। ASI उस परिसर का संरक्षण जारी रखे।

First Published on: May 15, 2026 5:22 PM
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