वसुंधरा राजे के बयान पर सियासी तूफान, मदन राठौड़ ने ठेठ अंदाज से दिया करारा जवाब

जयपुर। राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया बयान पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने राजस्थानी कहावत के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है और पार्टी के अंदरूनी गलियारों में हलचल मचा दी। दरअसल, 6 अप्रैल को भाजपा स्थापना दिवस के मौके पर झालावाड़ की जनसभा में वसुंधरा राजे ने मुस्कुराते हुए कहा, “लोग मुझसे कहते हैं कि मेरा काम नहीं हुआ, करवाओ… लेकिन भैया, मैं अब नहीं लड़ सकती। जब मेरा ही चला गया और मैं खुद को नहीं बचा पाई, तो तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूं।”

इस बयान को कई लोगों ने वसुंधरा राजे के सीएम पद न मिलने के दर्द और असंतोष के रूप में देखा। उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों की शिकायतें सुनकर उन्होंने जवाब दिया कि धौलपुर में सड़क के लिए उनकी अपनी जमीन भी चली गई, लेकिन वे उसे भी नहीं बचा पाईं। राजे का कहना था कि यह बयान पद की बात नहीं, बल्कि आम लोगों से संवाद के दौरान व्यक्तिगत अनुभव साझा करने का था। हालांकि, यह बयान जनसभा में सार्वजनिक रूप से दिया गया था, न कि निजी बातचीत में।

बयान वायरल होने के बाद वसुंधरा राजे को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि कुछ षड्यंत्रकारी लोग उनके बयान को गलत तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। राजे ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब पद से नहीं था, बल्कि लोगों को समझाने के लिए उन्होंने अपना उदाहरण दिया कि जब वे खुद अपनी जमीन या हितों की रक्षा नहीं कर पाईं, तो दूसरों के लिए नियम कैसे बदल सकती हैं। उन्होंने कहा, “मेरा चला गया, मैं नहीं बचा सकी अपने आपको।” राजे ने यह भी जोड़ा कि लोगों का प्यार ही सबसे बड़ा पद है और कुछ लोग राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

दूसरी ओर, इस बयान पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तीखा, लेकिन ठेठ राजस्थानी अंदाज में जवाब दिया। जब बीकानेर दौरे के दौरान उनसे वसुंधरा राजे के बयान और उनके काम न होने के सवाल पूछे गए, तो राठौड़ ने एक पुरानी राजस्थानी (मारवाड़ी) कहावत का सहारा लिया।

उन्होंने कहा, “चिट्ठी चूर-चूर करे, मांगे डाल और घी, मोदी सु कुन झगड़ो करे, चिट्ठी खानी नाल।” इसका मतलब यह है कि सूखी रोटी (चिट्ठी) को भी चूर-चूर करके उसमें खूब सारी दाल और घी डालकर आनंद से खाना चाहिए। यानी जो कुछ मिला है, उसे अच्छा बनाकर उसका सुख लेना चाहिए। यहां ‘चिट्ठी’ का मतलब रोटी से है, जबकि ‘मोदी’ का मतलब अनाज के दुकानदार या उस स्रोत से है, जिससे अनाज मिलता है और घर चलता है। इस कहावत का सार है कि जिससे हमारा भरण-पोषण होता है, उससे भला झगड़ा क्यों मोल लिया जाए? अगर उससे झगड़ा किया, तो फिर रोटी किसके साथ खाएंगे?

मदन राठौड़ ने इस कहावत के जरिए वसुंधरा राजे को स्पष्ट और सूक्ष्म नसीहत दी है। संदेश यह है कि जो कुछ पार्टी में मिला है या वर्तमान स्थिति है, उसमें संतोष करना चाहिए, उसे बेहतर बनाकर काम करना चाहिए और अनावश्यक झगड़ों से बचना चाहिए। राठौड़ ने यह भी कहा कि वसुंधरा राजे के सभी काम हो रहे हैं और वे आज भी पार्टी की महत्वपूर्ण नेता हैं। साथ ही उन्होंने यह इशारा भी किया कि हर बार सीएम पद मिलना जरूरी नहीं है।

वसुंधरा राजे लंबे समय से पार्टी में अपनी भूमिका और प्रभाव को लेकर असंतुष्ट नजर आ रही हैं। उनके बेटे दुष्यंत सिंह की जनसंवाद यात्रा के दौरान दिए गए बयान ने इस असंतोष को सार्वजनिक रूप दे दिया। वहीं मदन राठौड़, जो हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, पार्टी अनुशासन और एकजुटता पर जोर दे रहे हैं। राजस्थान की सियासत में यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है। ऐसे में नेताओं के बीच छोटे-छोटे बयानों और जवाबों से पार्टी की एकता पर सवाल उठ सकते हैं। वसुंधरा राजे ने सफाई देते हुए कहा कि वे लोगों से सीधा संवाद कर रही थीं और उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था।

First Published on: April 12, 2026 10:37 AM
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