असम की बाढ़ से किस प्रकार प्रभावित हो रहा है काज़ीरंगा नेशनल पार्क


काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में कार्यरत विशेषज्ञों के अनुसार, पहले इस तरह की भयानक बाढ़ 10 वर्षों में एक बार आती थी, जबकि अब इस तरह की बाढ़ प्रत्येक 2 वर्ष में एक बार आ जाती है, जिससे इस क्षेत्र को व्यापक पैमाने पर नुकसान का सामना करना पड़ता है।


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असम में ब्रह्मपुत्र नदी एक बाद फिर अपने रौद्र रुप में आ चुकी हैं। ब्रह्मपुत्र नदी जलस्‍तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है और इसी के साथ भारतीय मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में असम के कई इलाकों में और अधिक बारिश होने का अनुमान लगाया है। असम राज्य में बाढ़ से संबंधित घटनाओं में अब तक लगभग 85 लोगों की मौत हो गई है और राज्य के 30 जिलों में 33 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट अनुसार, वर्तमान में काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व का लगभग 85 फीसदी हिस्सा जलमग्न है। असम की इस भयावह बाढ़ से काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में कुल 125 जानवरों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जबकि इस दौरान कुल 86 जानवरों की मृत्यु हो गई है, जिसमें गैंडे, हिरन और जंगली सूअर आदि शामिल हैं। हालाँकि कई विशेषज्ञ असम में आने वाली वार्षिक बाढ़ को काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व के अस्तित्त्व के लिये आवश्यक मानते हैं।

काज़ीरंगा के लिए कितनी बड़ी समस्या है असम बाढ़ 

काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में कार्यरत विशेषज्ञों के अनुसार, पहले इस तरह की भयानक बाढ़ 10 वर्षों में एक बार आती थी, जबकि अब इस तरह की बाढ़ प्रत्येक 2 वर्ष में एक बार आ जाती है, जिससे इस क्षेत्र को व्यापक पैमाने पर नुकसान का सामना करना पड़ता है। अनुमान के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन और निर्वनीकरण जैसे कारकों के कारण इस क्षेत्र में बाढ़ तेज़ी से विनाशकारी होती जाएगी। वर्ष 2018 को छोड़कर, वर्ष 2016 से वर्ष 2020 के बीच आई सभी बाढ़ें विनाशकारी और भयानक प्रकृति की थीं, अर्थात इनमें काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जलमग्न हो गया था, इन बाढ़ों के कारण सैकड़ों जानवरों की मृत्यु हो गई थी और हज़ारों जानवर घायल हो गए थे। हालाँकि बीते कुछ वर्षों में सतर्क निगरानी के कारण जानवरों की मृत्यु की संख्या में कमी आई है। 

असम में हर साल बाढ़ क्यों आता है ?

असम हर साल बाढ़ आने के निम्न चार कारण जिम्मेदार है इसमें पहला कारण नदी घाटी में बसे होने की वजह से यहां रहने की जगह बहुत ही कम है। यहां चाय के बागान हैं, जो ऊंचे इलाकों पर हैं। निचले इलाकों में भी कुछ हिस्से में नदी है तो कुछ में जंगल है। यहां थोड़ा ही हिस्सा रहने लायक बचता है। उसमें भी लोग खेती-किसानी करते हैं। दूसरा सामान्य से ज्यादा बारिशः ब्रह्मपुत्र बेसिन की वजह से हर साल यहां सामान्य से 248 सेमी से 635 सेमी ज्यादा बारिश होती है। मानसून सीजन में यहां हर घंटे 40 मिमी से भी ज्यादा बारिश होती है। इतना ही नहीं, कई इलाकों में तो एक ही दिन में 500 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

तीसरा निचले इलाके में पानी भरने सेः असम पहाड़ी इलाका है और इस कारण जब भी पहाड़ों पर बारिश होती है, तो वो बहकर ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में आ जाता है। इससे पानी नदियों के किनारे बहने लगता है और बाढ़ का कारण बनता है। चौथा कम जगह में ज्यादा आबादीः 1940-41 में असम में कई जिलों में ब्रह्मपुत्र घाटी में हर एक किमी के दायरे में 9 से 29 लोग रहते थे। लेकिन, अब यहां हर वर्ग किमी में 200 लोग रहने लगे हैं। इससे घाटी में हर साल बाढ़ की समस्या बढ़ गई है।

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में रोचक जानकारी

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान मध्‍य असम में 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है। इस उद्यान में भारतीय एक सींग वाले गैंडे (राइनोसेरोस, यूनीकोर्निस) का निवास है। काजीरंगा को वर्ष 1905 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। सर्दियों में यहाँ साइबेरिया से कई मेहमान पक्षी भी आते हैं, हालाँकि इस दलदली भूमि का धीरे-धीरे ख़त्म होते जाना एक गंभीर समस्या है। काजीरंगा में विभिन्न प्रजातियों के बाज, विभिन्न प्रजातियों की चीलें और तोते आदि भी पाये जाते हैं।
(साभार  – नागरिक न्यूज़)