गाजियाबाद। 21 जून की शाम गाजियाबाद के हिन्दी भवन में प्रासंगिक रीवा की दिल्ली इकाई ने रंग निर्देशक आलोक शुक्ला के चर्चित नाटक “उसके साथ” और “ख़्वाब” का भावपूर्ण मंचन किया.. इस शाम की पहली क़रीब एक घंटे की प्रस्तुति “उसके साथ’ लेखक आलोक शुक्ला के सामने 1997 में मुंबई में घटी एक सत्य घटना पर आधारित रेप पीड़िता पर नाटक था जहां मुंबई के एक व्यस्त गली के डिवाइडर पर एक औरत बच्चा पैदा कर रही थी..इसी घटना को केंद्र में रख कर एक लड़की के पूरे जीवन को इस नाटक में दर्शाया गया था।
इस नाटक की केंद्रीय भूमिका में कविता के मार्मिक अभिनय ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया, ऐसे ही इंस्पेक्टर, अजनबी, पति, बेटे, अटेंडेंट आदि विभिन्न भूमिकाओं को निभा रहे एडवोकेट टेकचंद राजपूत और लेखक की भूमिका में आलोक शुक्ला?
डॉक्टर व नर्स की भूमिका में सिमरन, शेल्टर होम संचालिका की भूमिका में विजय लक्ष्मी, साहब और चाचा की भूमिका में प्रताप सिंह, मंदार की भूमिका में विनय शर्मा और कांस्टेबल की भूमिका में अंजली माथुर तथा छोटी बच्ची की भूमिका में माही ने बेहतरीन काम किया।
नाटक का संगीत अभ्युदय मिश्रा और आशीष मित्तल ने दिया, प्रकाश और मंच सज्जा थी टेकचन्द और सहायक की भूमिका निभाई मृदुल कुमार, विनय शर्मा और निखिल कुमार ने जबकि ध्वनि व्यवस्था में थे विनय शर्मा। वस्त्र सज्जा में थीं विजय लक्ष्मी और नीतू शुक्ला।
इसके बाद इस शाम की क़रीब एक घंटे की दूसरी प्रस्तुति नाटक ख़्वाब थी जो बुजुर्गों की दशा पर आधारित मूलतः एक एकल नाटक था जहां एक बूढ़ा आदमी अपने को भरा पूरा कहते हुए दर्शकों को ऐसा एहसास देता है कि वो पूरे परिवार के साथ बड़ी ख़ुशी से रह रहा है लेकिन अंत में खुलता है कि वो एक वृद्धाश्रम में रह रहा है जिसे उसके बच्चों ने घर से निकाल दिया है।
इस नाटक की केंद्रीय भूमिका को ख़ुद नाटक लेखक और निर्देशक आलोक शुक्ला ने बखूबी अंजाम दिया, तो अजनबी और वृद्धाश्रम के अटेंडेंट की भूमिका में एडवोकेट टेकचन्द राजपूत और पत्नी की आवाज़ में विजय लक्ष्मी, बहु के रूप में कविता और बेटे प्रसाद के रूप में छाया भूमिका निभाई विनय शर्मा ने। सभी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया।
नाटक का संगीत संदीप मुखर्जी और नवनीत पांडेय ने दिया, प्रकाश और मंच सज्जा और ध्वनि व्यवस्था में टेकचन्द थे तो सहायक की भूमिका निभाई विनय और निखिल ने। दोनों ही नाटकों के नेपथ्य प्रमुख की भूमिका में थे प्रताप सिंह और सहयोगी थे मृदुल कुमार और नतेशा।
नाटकों की प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा, इस अवसर पर हिंदी भवन के सचिव सुभाष गर्ग रंग निर्देशक आलोक शुक्ला तथा पूरी टीम का इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए धन्यवाद दिया। मंच संचालन सुप्रीम कोर्ट के वकील वागीश शर्मा ने किया। दोनों नाटकों के बीच हुए इंटरवल के दौरान हिन्दी भवन के सुभाष गर्ग द्वारा लिखे और अभिनीत अल्बम ऑपरेशन सिंदूर को दिखाया गया। जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
