श्रम मंत्री का बयान गैर जिम्मेदाराना, वेज रिवीजन तत्काल करें सरकार

लखनऊ। नोएडा श्रमिक असंतोष में श्रम मंत्री का पाकिस्तानी कनेक्शन की बात करना बेहद गैर जिम्मेदाराना, निंदनीय और श्रमिकों का अपमान है। सच्चाई यह है कि तीन-तीन बार विधानसभा में घोषणा करने के बावजूद श्रम मंत्री ने आज तक प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी के वेज रिवीजन की कार्रवाई नहीं की। हालत इतनी बुरी है कि प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की दरें केंद्र सरकार की तुलना में आधी है और बाजार दर से भी बेहद कम है। इस महंगाई में इतनी कम मजदूरी में अपने परिवार का खर्च चलाना मजदूरों के लिए बेहद कठिन हो गया है।

मुख्यमंत्री को प्रदेश में वेज रिवीजन की तत्काल घोषणा करनी चाहिए, केंद्र सरकार के समतुल्य 26000 रुपए न्यूनतम वेतन करना चाहिए, हर हाल में काम की घंटे आठ रखने का आदेश देना चाहिए, श्रमिक नेताओं व श्रमिकों के नोएडा व एनसीआर में हर प्रकार के उत्पीड़न पर रोक लगानी चाहिए और श्रमिकों की समस्याओं के शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक समाधान के लिए अपनी अध्यक्षता में श्रमिक संगठनों की तत्काल बैठक बुलानी चाहिए।

यह बातें आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में श्रमिक संगठनों ने उठाई। वर्कर्स फ्रंट के पूर्व अध्यक्ष दिनकर कपूर, एटक के प्रदेश महामंत्री चंद्रशेखर, टीयूसीसी के प्रदेश महामंत्री प्रमोद पटेल ने इस पत्र को मुख्यमंत्री को ईमेल द्वारा भेजा। इस पत्र की एक प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव (श्रम) को भी भेजी गई।

पत्र में कहा गया कि नोएडा में श्रमिक असंतोष शासन-प्रशासन और प्रबंधन की आधुनिक गुलामी की नीतियों और कार्रवाइयों के कारण पैदा हुआ। हालत यह है कि 200 वर्षों के संघर्षों से हासिल काम के 8 घंटे के अधिकार को नए लेबर कोड और राज्य सरकार ने कारखाना अधिनियम में संशोधन कर समाप्त कर दिया। मजदूरों से 12 घंटे काम कराया जा रहा है और उसमें भी साप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जा रहा है।

स्थाई प्रकृति के कामों में गैर कानूनी ठेका प्रथा चल रही है। कानून की राज की जगह श्रम कानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। प्रदेश की शांति, समृद्धि और विकास के लिए हालातों को बदलने और कानून के राज की स्थापना की जगह नोएडा की घटना में साजिश की अनाप-शनाप बयान बाजी हो रही है और उपद्रवी तत्वों के नाम पर श्रमिक नेताओं व श्रमिकों का बर्बर उत्पीड़न किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए अशुभ है। नेताओं ने कहा कि नोएडा घटना के बाद प्रदेश के विभिन्न अंचलों में सरकार द्वारा की गई न्यूनतम वेतन वृद्धि अपर्याप्त है।

सरकार को कम से कम 26000 रुपए न्यूनतम मजदूरी तय करनी चाहिए और हर हाल में श्रम कानून के कड़ाई से अनुपालन को सुनिश्चित करना चाहिए। श्रमिक नेताओं ने प्रदेश के राजनीतिक दलों, सभी श्रम संगठनों और गणमान्य नागरिकों से नोएडा श्रमिक आंदोलन के पक्ष में खड़ा होने की अपील भी की है।

(दिनकर कपूर, पूर्व अध्यक्ष यू. पी. वर्कर्स फ्रंट)

First Published on: April 14, 2026 7:53 PM
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