अमेरिका क्यों छोड़ना चाहते हैं 10 में से 4 भारतीय?

कभी जो अमेरिकन ड्रीम भारत के सबसे मेधावी दिमागों को अपनी ओर खींचता था, आज वही सपना लाखों भारतीयों के लिए एक अंतहीन संघर्ष और अनिश्चितता का पर्याय बन गया है। डॉलर की चमक और सिलिकॉन वैली की ऊंची इमारतों के पीछे अब एक कड़वी हकीकत छिपी है- जहां अमेरिका की कुल आबादी का महज 1.5% होने के बावजूद 6% टैक्स योगदान देने वाले भारतीय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। आखिर वह क्या कारण है कि 10 में से 4 भारतीय-अमेरिकी अब अपना घर-बार समेटकर इस देश से निकल जाना चाहते हैं?

फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच आए कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के आंकड़ों ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। इस सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लगभग 40% भारतीय-अमेरिकी समुदाय अब अमेरिका छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोच रहा है। जो समुदाय कल तक अमेरिका की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था, वह आज एक गहरी अस्थिरता या टर्बुलेंस के दौर से गुजर रहा है। यह संख्या कोई मामूली बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़े पलायन के संकेत हैं जो महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका की आधारभूत नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

पलायन का विचार रखने वाले 58% लोगों ने सबसे बड़ी वजह खराब राजनीतिक माहौल को बताया है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में जिस तरह का ध्रुवीकरण हुआ है, उसने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के मन में अपनेपन की भावना को कम कर दिया है। करीब 71% भारतीय-अमेरिकी ट्रंप प्रशासन के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ‘अमेरिका सिर्फ अमेरिकियों के लिए है’ जैसी नीतियों ने भारतीयों को यह संदेश दिया है कि वे भले ही कितना भी योगदान क्यों न दें, उन्हें हमेशा बाहरी माना जाएगा। इससे उनकी पहचान और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

राजनीतिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले भारतीय समुदाय को डेमोक्रेटिक पार्टी का पक्का समर्थक माना जाता था, लेकिन 2020 के 52% समर्थन के मुकाबले अब यह आंकड़ा गिरकर 46% रह गया है। रिपब्लिकन पार्टी भी उन्हें अपनी ओर खींचने में नाकाम रही है। नतीजतन, लगभग 30% भारतीय अब निर्दलीय या इंडिपेंडेंट विचारधारा की ओर झुक रहे हैं। भारतीय समुदाय अब किसी पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा, बच्चों के भविष्य और आर्थिक स्थिरता के आधार पर अपने निर्णय ले रहा है।

भारतीय-अमेरिकियों के मोहभंग की सबसे क्रूर सच्चाई इमिग्रेशन का टूटा हुआ सिस्टम है। यदि कोई भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आज ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता है, तो उसे 30 से 40 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। वीजा बुलिटेन मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, EB-2 और EB-3 श्रेणियों में कट-ऑफ डेट अभी भी 2013-14 के आसपास अटकी हुई है। कुछ मामलों में यह इंतजार 70 साल तक का हो सकता है। यह स्थिति सिस्टम के स्ट्रक्चरल फेल्योर को दर्शाती है। जब तक ग्रीन कार्ड मिलता है, तब तक लोग रिटायर होने की उम्र तक पहुंच जाते हैं और बच्चे अपनी जड़ें कहीं और जमा चुके होते हैं।

अमेरिका अब सस्ता नहीं रहा। बच्चों की पढ़ाई, हेल्थकेयर और चाइल्ड केयर के खर्चों ने मध्यमवर्गीय भारतीयों की कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि एक बच्चे को 18 साल तक पालने का औसत खर्च 2 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंच गया है। सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क जैसे टेक हब में किराए के मकानों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके अलावा, भेदभाव की चिंताएं भी कम नहीं हैं। भले ही बड़ी हिंसा कम हुई हो, लेकिन ऑफिसों और समाज में होने वाला बौद्धिक भेदभाव भारतीयों को अंदर से तोड़ रहा है। वे अब वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते जैसा कि वे एक दशक पहले करते थे।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जो लोग अमेरिका छोड़ना चाहते हैं, उनमें से सभी भारत नहीं लौट रहे हैं। वे अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों की ओर देख रहे हैं। इन देशों में नागरिकता के नियम उदार हैं, टैक्स स्ट्रक्चर बेहतर है और जीवन जीने की लागत अमेरिका की तुलना में काफी कम है। यह उन देशों के लिए तो अवसर है, लेकिन अमेरिका के लिए यह एक बड़ी ब्रेन ड्रेन की चेतावनी है। अमेरिका का अट्रैक्शन अब धुंधला पड़ रहा है, और यदि उसने अपने इमिग्रेशन सिस्टम को नहीं सुधारा, तो वह अपने सबसे कुशल टैलेंट को खो देगा।

यह समस्या अस्थायी नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक संरचनात्मक विफलता है। कॉलेजों में H-1B नियुक्तियों को सीमित करने के प्रयास और इमिग्रेशन कागजी कार्रवाई का डर परिवारों को ट्रूली सेटल्ड महसूस नहीं होने देता है। अमेरिका की आर्थिक महाशक्ति होने का सपना अब निजी जीवन की गुणवत्ता के आगे फीका पड़ रहा है। आने वाले वर्षों में, यदि यह पलायन इसी गति से जारी रहा, तो न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा, बल्कि यह वहां रहने वाले भारतीयों के लिए भी एक नए युग की शुरुआत होगी।

First Published on: April 23, 2026 9:27 AM
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