महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा अब देश के दोनों सदनों में होगी। इसके लिए बकायदा सरकार विशेष सत्र बुलाने जा रही है। यह सत्र तीन दिनों का होगा। यानी 16, 17 और 18 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र में महिलाओं के अधिकारों और देश में आधी आबादी के योगदान को लेकर एक स्वस्थ्य बहस सदन में देखने को मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, यह सत्र तीन दिन तक चलेगा। इसका मकसद देश के निर्वाचन क्षेत्र और पार्लियामेंट में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा।
विशेष सत्र से जुड़े फैसले को लेकर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बताया कि संसद आज स्थगित हो जाएगी। महिलाओं के आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानून के लिए दो से तीन हफ्तों के बाद सदन फिर से बैठेगा। सदन के विधायी कामकाज पर जयराम रमेश के सवाल पर भी रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस मामले पर 80 प्रतिशत से ज्यादा पार्टियों से सलाह मशविरा किया है।
उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार को पत्र लिखकर विधानसभा चुनावों को खत्म होने के बाद संसद बुलाने की मांग की है। मंत्री ने कहा कि सरकार मनमाने ढंग से काम नहीं कर रही है। बल्कि सभी पार्टी के सांसदों से सलाह ली जा रही है। रिजिजू ने कहा कि महिलाओं का आरक्षण का ऐसा मुद्दा है, जिसे संसद में सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए।
इधर, इस मुद्दे पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, ताकि पार्टियां अपने विचार रख सकें। प्रस्ताव को आगे बढ़ा सकें।
