इप्टा के लिए नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बेहतर समाज के निर्माण का माध्यम है

नागरिक न्यूज नागरिक न्यूज
मध्य प्रदेश Updated On :

इंदौर। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की इंदौर इकाई द्वारा तैयार किए गए नाटक “आज़ादी के तराने” की हाल ही में इंदौर, मुंबई और पुणे में सफल प्रस्तुतियों के उपरांत इंदौर लौटने पर कलाकारों, तकनीकी सहयोगियों और टीम के सभी सदस्यों के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सभी साथियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके योगदान का सम्मान किया गया।

अभिनव कला समाज, इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्टेट प्रेस क्लब, इंदौर के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने कलाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ निरंतर होती रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिनव कला समाज कलाकारों के लिए सदैव खुला है। इप्टा जैसा राष्ट्रीय सम्मानजनक मंच मिलना युवा कलाकारों के लिए बड़ी उपलब्धि है और ऐसे अनुभव जीवन भर स्मृतियों में बने रहते हैं।

इप्टा के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने कहा कि इप्टा का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि नाट्यकर्म के माध्यम से बेहतर मनुष्य और बेहतर समाज का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि इप्टा की विचारधारा वैज्ञानिक चेतना, तार्किकता और मानवीय मूल्यों पर आधारित है तथा हर कलाकार और दर्शक को नाटक के अनुभव से अधिक संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनना चाहिए।

उन्होंने बताया कि मुंबई में नाटक की प्रस्तुति के बाद प्रख्यात फिल्मकार आनंद पटवर्धन ने कहा था कि इतिहास को पढ़ना और समझना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि उसके माध्यम से वर्तमान को समझने की दृष्टि विकसित होती है।

उन्होंने नाटक के शोध और प्रस्तुति की सराहना की। यह नाटक हर दृष्टि से सराहा गया। उन्होंने बताया कि 25 मई 2026 को इप्टा की स्थापना के 82 वर्ष पूर्ण हुए हैं और 83वाँ वर्ष शुरू हुआ है। हाल में ख्वाजा अहमद अब्बास और ऋत्विक घटक जैसे इप्टा से जुड़े महान लोगों का जन्मदिन भी गुजरा है। इप्टा के साथ बहुत बड़े कलाकारों के नाम जुड़े हैं। एक तरफ़ यह गर्व की बात है लेकिन दूसरी तरफ़ यह जिम्मेदारी भी है कि इसके शानदार इतिहास को शानदार वर्तमान और शानदार भविष्य में जारी रखना है।

इप्टा इंदौर के सचिव प्रमोद बागड़ी ने कहा कि वे इस नाटक की परिकल्पना से लेकर विभिन्न प्रस्तुतियों तक इसके साथ जुड़े रहे हैं। समय और मंचन के अनुभवों के साथ इसकी पटकथा और कला पक्ष अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने कहा कि 1942 के आंदोलन में यूसुफ मेहर अली और राममनोहर लोहिया जैसे व्यक्तित्वों के योगदान को भी नाटक में स्मरण किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ साहित्यकार चुन्नीलाल वाधवानी ने कहा कि वर्तमान समय में इप्टा को लगातार सक्रिय रहकर सांस्कृतिक हस्तक्षेप को मज़बूत करने की आवश्यकता है। वहीं मुम्बई इप्टा में काम कर चुके इंदौर के कलाकार हेमंत कमल चौरसिया ने कहा कि इप्टा के माध्यम से इंदौर में नियमित रूप से नाट्य गतिविधियाँ और प्रस्तुतियाँ होती रहनी चाहिए।

नाटक की सह-निर्देशक सारिका श्रीवास्तव ने कलाकार साथियों की सराहना करते हुए कहा कि नाटक निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया है, जो किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं होती। उन्होंने कहा कि सभी साथियों के सहयोग, समर्पण और सामूहिक श्रम ने “आज़ादी के तराने” को सफल बनाया है और आगे भी इसी भावना के साथ काम जारी रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान साथी शर्मिष्ठा ने जनगीत प्रस्तुत किए। इसके बाद नाटक से जुड़े कलाकारों मधु वेद, नीता जैन, नीपा पंड्या, राघवेंद्र तिवारी, निर्मल जैन, उजान बैनर्जी, देवराज सिंह, इशिका शर्मा और गीतांजलि ने नाटक की तैयारियों, यात्राओं और प्रस्तुतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

नाटक की संकल्पना एवं शोध जया मेहता द्वारा किया गया था। पटकथा लेखन जया मेहता और विनीत तिवारी ने किया। निर्देशन गुलरेज़ ख़ान और सारिका श्रीवास्तव ने किया, जबकि वरिष्ठ रंगकर्मी फ्लोरा बोस का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

उल्लेखनीय है कि नाटक की पहली प्रस्तुति 19 मई 2026 को इंदौर में अभिनव कला समाज के सहयोग से, दूसरी प्रस्तुति 23 मई 2026 को मुंबई में इप्टा की राष्ट्रीय इकाई एवं इप्टा मुंबई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य समारोह में तथा तीसरी प्रस्तुति 24 मई 2026 को पुणे में शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हुई थी। पिछले वर्ष यह नाटक दिल्ली में भी प्रदर्शित हुआ था और बहुत सराहा गया था।

इस अवसर पर इप्टा इंदौर के अध्यक्ष अशोक दुबे, अरविंद पोरवाल, अभय नेमा, अनुराधा तिवारी और बरखा नेमा सहित अनेक रंगकर्मी एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नाटक के निर्देशक गुलरेज़ ख़ान पिता के निधन के कारण उपस्थित नहीं रह सके।

कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ, जहाँ सभी साथियों ने मिठाई और गर्मागर्म भजियों के साथ शर्मिष्ठा के जनगीतों का आनंद लिया तथा शीघ्र ही पुनः मिलने और नये सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

(इंदौर से सारिका श्रीवास्तव की रिपोर्ट)