मानसून सीजन की शुरुआत होते ही बारिश ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। एक तरफ बारिश से सड़कों पर जलभराव और मकान ढहने की खबरें सामने आ रही हैं। मानसून की बारिश से देश के अलग-अलग राज्यों से इस तरह के हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मकान ढहने से बड़े हादसे हुए हैं।
देश के कई हिस्सों में बुधवार को मानसून की भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। मूसलाधार बारिश के कारण कई स्थानों पर अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए और रेल तथा सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ में कूड़े का पहाड़ एक इमारत पर गिरने से 11 लोगों के फंसे होने की आशंका है। वहीं दिल्ली और मुंबई के कई इलाकों में जलभराव हो गया।
दिल्ली के रोहिणी इलाके में बुधवार को निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने बताया कि चार से पांच लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। इसने बताया कि मृतक की पहचान राम किशोर (42) के रूप में हुई है। उन्हें मलबे से निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अब यह मौतों की संख्या बढ़कर 3 हो गई है और 1 व्यक्ति घायल है।
पुलिस ने बताया कि बचाए गए लोगों में रवि (35) जो पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) का काम करता है, तथा 32 वर्षीय सद्दाम शामिल हैं। सद्दाम के पैर और हाथ में फ्रैक्चर हुआ है तथा उनका इलाज बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में किया जा रहा है।
पुलिस ने बताया कि दो अन्य लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि इमारत गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर भेज दी गईं।
पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट की इमारत ढहने के मामले में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। बचाव दल ने अब तक कुल 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इससे पहले 6 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था, जबकि ताजा रेस्क्यू अभियान में 3 और कर्मचारियों को बाहर निकालने में सफलता मिली है।
हालांकि, आशंका है कि भूतल (ग्राउंड फ्लोर) में अभी भी 8 कर्मचारी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। ये कर्मचारी कई घंटों से मलबे में दबे हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। घटनास्थल पर सेना, NDRF, पिंपरी-चिंचवड़ अग्निशमन विभाग और पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत-बचाव कार्य कर रही हैं।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारी बारिश के बीच बड़ा फुहारा इलाके में एक पुरानी व्यावसायिक इमारत गिरने से एक बड़ा हादसा टल गया। अधिकारियों ने बताया कि इमारत की असुरक्षित स्थिति का समय पर पता लगाने और उसे पहले ही खाली करा लेने से जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। शहर के व्यस्त बाजार इलाकों में से एक में स्थित पांच मंजिला इमारत के गिरने से दहशत फैल गई, लेकिन प्रशासन की तैयारियों के चलते कोई भी व्यक्ति मलबे के नीचे नहीं दबा।
स्थानीय भाजपा सांसद आशीष दुबे ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि इस घटना से पुरानी इमारतों से उत्पन्न जोखिमों की पहचान करने और उन्हें दूर करने का महत्व रेखांकित होता है, खासकर मानसून के मौसम में।
उन्होंने कहा कि सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ और जिला प्रशासन ने इमारत की पुरानी स्थिति और बरसात के मौसम में बढ़ते जोखिमों के कारण इसे खतरनाक घोषित कर दिया था। इमारत गिरने से पहले ही उसे खाली करा लिया गया था। शाम करीब 7:30 बजे इमारत ढह गई।
अजमेर के किशनगढ़ में लगातार बारिश के बीच एक मकान ढह गया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से परिवार के सभी सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मदनगंज थाना के सहायक उपनिरीक्षक सत्येंद्र सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान चलाकर परिवार को सुरक्षित निकाल लिया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रशासन ने लोगों से लगातार बारिश के दौरान जर्जर या कमजोर इमारतों से दूर रहने और सतर्कता बरतने की अपील की है।
