संसद रत्न से नवाजे गए जगदंबिका पाल, राहुल-अखिलेश पर किया वार

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उत्तर प्रदेश Updated On :

डुमरियागंज से भारतीय जनता पार्टी सांसद जगदंबिका पाल ने प्रतिष्ठित संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय बस्ती, सिद्धार्थनगर और पूरे पूर्वांचल की जनता और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को समर्पित किया है। उन्होंने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन लाखों नागरिकों के विश्वास का परिणाम है, जिन्होंने उन्हें संसद में अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा।

2026 के संसदीय सत्रों के दौरान उन्होंने सदन में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके साथ ही उन्होंने शून्यकाल के दौरान जनहित के ज्वलंत मुद्दे उठाए, कई प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए और राष्ट्रीय महत्व की बहसों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे।पी। नड्डा के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव में मात्र तीन महीने का समय शेष बचा है, लेकिन मुख्य विपक्षी नेताओं का धरातल पर कोई अता-पता नहीं है। राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में कहीं नजर नहीं आ रहे, तो वहीं अखिलेश यादव केवल सोशल मीडिया और ट्विटर तक ही सीमित होकर रह गए हैं। विपक्षी दल नंबर दो और नंबर तीन की लड़ाई में उलझे हुए हैं और समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस जैसे दल अपने-अपने परिवारवाद और व्यक्तिगत राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

पूर्वांचल में हो रहे बुनियादी ढांचे के कायाकल्प को रेखांकित करते हुए सांसद ने बताया कि बस्ती और सिद्धार्थनगर में करीब चार सौ से पांच सौ करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। खलीलाबाद-ढेलियागंज-बांसी नई रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और गोरखपुर-शामली आठ-लेन एक्सप्रेसवे सहित तेरह नए एक्सप्रेसवे क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं।

हर जिले में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और अयोध्या व गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की स्थापना से पूरे क्षेत्र का विकास सुनिश्चित हुआ है। उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली कनेक्शन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिला है।

संसद में विपक्ष द्वारा पैदा किए जा रहे गतिरोध और बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद ने कहा कि देश की आधी आबादी को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण बिल एक ऐतिहासिक कदम है। जो दल संसद में इसका विरोध कर रहे हैं, वे सीधे तौर पर मातृशक्ति के सशक्तिकरण का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के पास नीति और नीयत दोनों का अभाव है, जिसके कारण वे केवल स्व-ट्रोलिंग में लगे हुए हैं, जबकि जनता एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ डबल इंजन सरकार को चुनने के लिए पूरी तरह तैयार है।