गांधी जयंती पर तमिलनाडु CM विजय लॉन्च करेंगे ‘वेट्री पयानम थिट्टम’, महिलाओं को मिलेंगी मुफ्त बस सेवाएं

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दक्षिण भारत Updated On :

चेन्नई, 2 अक्टूबर: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर चेन्नई में ‘वेट्री पयानम थिट्टम’ (Vetri Payanam Thittam) योजना के विस्तारित स्वरूप की शुरुआत करेंगे। इस योजना के तहत राज्य में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का दायरा बढ़ाया गया है।

12,692 बसें योजना के दायरे में

अब महिलाओं को महानगरीय और शहरी क्षेत्रों में चलने वाली एक्सप्रेस, LSS और डीलक्स बसों में भी मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा जिलों के बीच चलने वाली साधारण उपनगरीय बसों और पहाड़ी क्षेत्रों में 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक चलने वाली साधारण बसों को भी योजना में शामिल किया गया है।

तमिलनाडु सरकार के सात परिवहन निगमों के तहत संचालित कुल 12,692 बसों को इस योजना के दायरे में लाया गया है। सरकार के अनुसार, इससे प्रतिदिन करीब 84.32 लाख महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।

कंडक्टरों के लिए जारी किया गया वीडियो

योजना के शुभारंभ के मद्देनजर बस कंडक्टरों द्वारा किए जाने वाले कार्यों और प्रक्रिया से संबंधित एक वीडियो भी जारी किया गया है। चेन्नई के कोयम्बेडु और अंबत्तूर में योजना की शुरुआत की जाएगी।

‘वेट्री पयानम’ मुफ्त बस योजना का उद्देश्य निर्धारित सरकारी बस सेवाओं में महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को किराया-मुक्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।

इससे पहले लॉन्च की थी ‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ योजना

मुख्यमंत्री विजय ने 28 सितंबर को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में ‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत पात्र नवजात शिशुओं को 22 कैरेट सोने की एक ग्राम की अंगूठी दी जा रही है।

यह योजना तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में लागू की जा रही है, हालांकि मदुरंथकम और धारापुरम को उपचुनाव के कारण इससे बाहर रखा गया है।

योजना का लाभ लेने के लिए पात्र माताओं को तमिलनाडु की स्थायी निवासी होना, PICME में पंजीकरण कराना और RCH ID प्राप्त करना आवश्यक है। लाभार्थियों को e-KYC सत्यापित आधार कार्ड के साथ निर्धारित पहचान या निवास संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।

सरकार के अनुसार, प्रत्येक सोने की अंगूठी पर एक विशिष्ट सीरियल नंबर होगा और इसे छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग में दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को सम्मानित करने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत करना है।



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