इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार से फोन पर बात की। उन्होंने कैप्टन की बहादुरी की जमकर तारीफ की। कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित पर जानलेवा हमला कर दिया था। वो खून से लथपथ हो गए थे, फिर भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली। नेतन्याहू ने उन्हें भारत, इजरायल और पूरी दुनिया का हीरो बताया। इस जांबाजी के सम्मान में इजरायली पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर इनवाइट किया है और मुख्य मशाल जलाने का न्योता दिया है।
नेतन्याहू ने स्मित मच्छर से की बात
आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर जब मौत सामने खड़ी थी, तब एक भारतीय पायलट के लोहे जैसे इरादों ने सैकड़ों जिंदगियों को क्रैश होने से बचा लिया। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कॉकपिट के भीतर हुई इस हैरतअंगेज वारदात के बाद अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर को फोन करके उनकी जांबाजी की तारीफें की हैं। उन्होंने स्मित को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इजरायल के स्वतंत्रता दिवस का न्योता दिया है। इस बातचीत के दौरान स्मित ने कुछ ऐसी बातें भी शेयर की हैं। जो पहली बार सामने आई हैं।
नेतन्याहू ने पीएम मोदी और कैप्टन स्मित को दिया इजरायल आने का न्योता
फोन पर बात करते हुए पीएम नेतन्याहू काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा, ‘आप सिर्फ भारत या इजरायल के ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के असली हीरो हैं’। इसके साथ ही नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को पीएम मोदी के साथ इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में खास मेहमान के रूप में न्योता दिया। इस ऐतिहासिक मौके पर वो इजरायल की मुख्य ‘मशाल टॉर्च’ प्रज्वलित करेंगे। आमतौर पर ये सम्मान सिर्फ इजरायल की महान हस्तियों को ही मिलता है।
‘पीछे से सिर पर पड़ा भारी वार’: कॉकपिट का वो भयानक पल
बातचीत के दौरान इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित से पूछा कि आखिर उस दिन कॉकपिट के भीतर ये सब कैसे शुरू हुआ था? इस पर कैप्टन स्मित मच्छर ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए हर एक डिटेल साझा की।
कैप्टन स्मित ने बताया कि को-पायलट कॉकपिट के भीतर नमाज पढ़ने की गुजारिश कर रहा था, जो कि एयरलाइंस में कोई असामान्य बात नहीं है। कैप्टन स्मित ने सम्मान देते हुए अपना ध्यान सामने की तरफ रखा। लेकिन तभी अचानक उनके सिर के पिछले हिस्से पर एक बहुत तेज और भारी वार हुआ।
कैप्टन स्मित ने बताया, ‘जब पहला वार हुआ, तो मुझे कुछ समझ नहीं आया और लगा कि प्लेन में कोई बहुत बड़ा तकनीकी खराबी आ गई है या विमान दुर्घटनाग्रस्त हो रहा है। लेकिन जब एक के बाद एक कई वार मेरे सिर पर होने लगे, तब मुझे अहसास हुआ कि खराबी विमान में नहीं, बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद उस शख्स के दिमाग में है’।
‘आंखों आगे अंधेरा था गया लेकिन हिम्मत नहीं हारी’, कैसे खोला कॉकपिट का दरवाजा?
हमलों की वजह से कैप्टन स्मित की आंखों के सामने पूरी तरह धुंधलापन और अंधेरा छा गया। उन्हें महसूस हुआ कि प्लेन बहुत तेजी से नीचे की तरफ गिर रहा है। सिर से लगातार खून बहने और आंखों के आगे अंधेरा छाने के बावजूद कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि कॉकपिट का दरवाजा अंदर से एक नॉब को घुमाकर ही खुल सकता था, जबकि बाहर से क्रू मेंबर्स इमरजेंसी कोड के जरिए खोलने की कोशिश कर रहे थे जिसे हमलावर सह-पायलट बार-बार ब्लॉक कर रहा था।
कैप्टन स्मित ने कहा, ‘मैं कॉकपिट के फर्श पर गिरा हुआ था। मुझे विमान के नीचे गिरने की और बाहर लोगों के चिल्लाने की खौफनाक आवाजें आ रही थीं। तभी मेरे भीतर एक आखिरी सांस और ताकत बची थी। मैंने खुद से कहा, अगर मैंने अभी ये दरवाजा नहीं खोला, तो मैं और ये सारे लोग मारे जाएंगे’।
कैप्टन ने अपनी बची-कुची पूरी ताकत झोंक दी, किसी तरह फर्श से उठकर दरवाजे के नॉब तक हाथ पहुंचाया और उसे घुमाकर खोल दिया। दरवाजा खुलते ही बाहर मुस्तैद खड़े क्रू मेंबर्स और यात्रियों ने तुरंत कॉकपिट में कूदकर उस हमलावर को दबोच लिया।
कैप्टन की जांबाजी सुन नेतन्याहू हैरान रह गए
कैप्टन स्मित की इस आपबीती को सुनकर पीएम नेतन्याहू हैरान रह गए। उन्होंने कैप्टन के ठंडे दिमाग और असंभव हालात में दिखाए गए साहस की तारीफ करते हुए कहा ‘आपकी बहादुरी अविश्वसनीय है। ये सचमुच ‘ट्विस्ट ऑफ फेट और ट्विस्ट ऑफ फेथ’ है। आपने न सिर्फ सैकड़ों मासूमों की जान बचाई, बल्कि दुनिया की उस भावना को बचाया जो ये मानती है कि एक बहादुर पायलट और साहसी यात्री किसी भी बुराई पर जीत हासिल कर सकते हैं’।
नेतन्याहू ने फोन पर कैप्टन स्मित की पत्नी और परिवार को भी अपना और अपनी पत्नी की तरफ से ढेर सारा प्यार और सम्मान भेजा और कहा कि वो अब इजरायल के राष्ट्रीय परिवार का हिस्सा हैं।
पीएम मोदी और कैप्टन स्मित को स्वतंत्रता दिवस का न्योता
बातचीत के दौरान पीएम नेतन्याहू ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ‘इजरायल के आने वाले स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य मशाल जलाने का सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान मेर मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मित को दिया जाएगा।
नेतन्याहू ने कहा कि ‘ये सम्मान आमतौर पर इजरायली नागरिकों के लिए सुरक्षित होता है, लेकिन इस बार इजरायल का हर नागरिक बांहें फैलाकर आपका स्वागत करेगा। आपने जो किया है, वो किसी चमत्कार से कम नहीं है।’
इसके साथ ही कैप्टन स्मित ने इजरायल के उस डेंटिस्ट डॉक्टर का भी शुक्रिया अदा किया, जिसने हमले के बाद उनका इलाज किया और उनकी जान बचाई। नेतन्याहू ने हंसते हुए बताया कि डॉक्टर ने भी कैप्टन के साहस की बहुत तारीफ की है।
पूरी दुनिया में गूंज रहा है भारतीय जांबाज का नाम
हजारों फीट की ऊंचाई पर अपनी जान दांव पर लगाकर सैकड़ों लोगों की जिंदगी सुरक्षित जमीन पर उतारने वाले कैप्टन स्मित मच्छर आज केवल भारत के ही नहीं, बल्कि इजरायल और पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन चुके हैं।
कॉकपिट में मौत को मात देने वाले इस भारतीय पायलट का ये ऐतिहासिक कारनामा आने वाली पीढ़ियों के लिए बहादुरी का प्रतीक रहेगा। अब हर किसी को इंतजार है उस पल का जब इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मित मच्छर एक साथ इस ऐतिहासिक कूटनीतिक और मानवीय रिश्ते की मशाल रोशन करेंगे।
कब होता है इजरायल का स्वतंत्रता दिवस?
इजरायल अपना स्वतंत्रता दिवस (Yom Ha’atzmaut) हर साल हिब्रू कैलेंडर के हिसाब से मनाता है, जो आमतौर पर अप्रैल या मई के महीने में पड़ता है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, 14 मई 1948 को इजरायल देश की स्थापना हुई थी, इसलिए इसकी तारीख हर साल थोड़ी बदलती रहती है। हिब्रू कैलेंडर के ‘इयार’ महीने की 5वीं तारीख को ये राष्ट्रीय त्यौहार पूरे देश में बड़े धूमधाम और आतिशबाजी के साथ मनाया जाता है।
