अगरतला : त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार को महान संगीतकार और गायक सचिन देव बर्मन (एस.डी. बर्मन) की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अगरतला स्थित रवींद्र शताब्दी भवन में एस.डी. बर्मन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भारतीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
1 अक्टूबर 1906 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के कोमिल्ला में जन्मे एस.डी. बर्मन त्रिपुरा के राजघराने से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने हिंदी और बंगाली सिनेमा में संगीतकार और पार्श्वगायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
‘उनके संगीत और गायकी से बहुत प्रभावित हूं’
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा ने एस.डी. बर्मन के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रशंसा साझा की। उन्होंने कहा, “मैं उनके संगीत, उनकी धुन और उनकी गायकी से बहुत प्रभावित हूं।”
मुख्यमंत्री ने उस स्थान से जुड़े एस.डी. बर्मन के संबंध का भी उल्लेख किया, जहां कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि यह कभी एस.डी. बर्मन का घर हुआ करता था, जिसे उन्होंने सरकार को दान कर दिया था और बाद में यहां रवींद्र भवन का निर्माण हुआ।
राजघराने से थे, लेकिन लोक संगीत से गहरा जुड़ाव
माणिक साहा ने कहा कि एस.डी. बर्मन राजघराने से होने के बावजूद बेहद सरल स्वभाव के थे। उन्होंने त्रिपुरा और बंगाल की लोक परंपराओं से मिले संगीत को अपनी कला में आत्मसात किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बर्मन ने नाविकों के गीतों और स्थानीय लोकधुनों को भी अपने संगीत में जगह दी और इन परंपराओं को अपने साथ लेकर कोलकाता और फिर मुंबई पहुंचे।
100 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत
एस.डी. बर्मन का संगीत सफर 100 से अधिक फिल्मों तक फैला रहा। उन्होंने ‘देवदास’, ‘प्यासा’, ‘गाइड’, ‘बंदिनी’ और ‘आराधना’ जैसी चर्चित फिल्मों के लिए संगीत दिया।
किशोर कुमार, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी और गीता दत्त जैसे दिग्गज गायकों के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार संगीत रचनाएं दीं।
युवाओं के लिए भी प्रेरणा हैं एस.डी. बर्मन
मुख्यमंत्री साहा ने एस.डी. बर्मन को एक ‘सेल्फ-मेड’ कलाकार बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता हासिल की। उन्होंने शास्त्रीय और पारंपरिक भारतीय संगीत के मेल की उनकी शैली को आज भी प्रासंगिक बताया।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी एस.डी. बर्मन के जीवन और संगीत यात्रा से यह सीख सकती है कि अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर आगे कैसे बढ़ा जा सकता है।
आर.डी. बर्मन ने आगे बढ़ाई संगीत की विरासत
एस.डी. बर्मन ने 1938 में संगीतकार मीरा देव बर्मन से विवाह किया था। दोनों के बेटे राहुल देव बर्मन, जिन्हें आर.डी. बर्मन और ‘पंचम दा’ के नाम से जाना जाता है, आगे चलकर भारतीय फिल्म संगीत के प्रमुख संगीतकारों में शामिल हुए।
एस.डी. बर्मन का निधन 31 अक्टूबर 1975 को हुआ। उनके निधन के बाद आर.डी. बर्मन ने अपने पिता की समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ाया और भारतीय फिल्म संगीत को एक नई दिशा दी।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कई गणमान्य लोगों और एस.डी. बर्मन के प्रशंसकों ने उन्हें याद किया तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत में उनके योगदान को नमन किया।
