नई दिल्ली: मशहूर गायिका सोना महापात्रा ने दिग्गज गायक दलेर मेहंदी के हालिया लाइव परफॉर्मेंस को लेकर उठे विवाद के बीच कलाकारों की पेशेवर जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कलाकारों के योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन दर्शकों को भी ईमानदार और गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुति पाने का हक है।
सोना ने दिल्ली के सुंदर नर्सरी में मार्च में आयोजित दूसरे सूफी हेरिटेज फेस्टिवल में दलेर मेहंदी का कार्यक्रम देखने का अपना अनुभव साझा किया। यह बयान उत्तराखंड के नई टिहरी में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद के बाद सामने आया है।
सोना महापात्रा ने साझा किया अपने अनुभव
सोना महापात्रा ने इंस्टाग्राम पर बताया कि उन्होंने अपनी प्रस्तुति के बाद दिल्ली में रुकने का फैसला किया था, ताकि अगले दिन फेस्टिवल का समापन करने वाले दलेर मेहंदी का कार्यक्रम देख सकें। वह और उनकी टीम उनके सूफी संगीत पर आधारित कार्यक्रम को सुनने के लिए उत्साहित थे।
हालांकि, सोना के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान उन्हें दलेर मेहंदी की प्रस्तुति निराशाजनक लगी। उन्होंने दावा किया कि जिस जगह से वे कार्यक्रम देख रहे थे, वहां से गायक असहज नजर आए, सुर को संभालने में कठिनाई महसूस कर रहे थे और एक ही संगीत पंक्ति बार-बार दोहरा रहे थे।
सोना ने यह भी कहा कि कार्यक्रम के दौरान कुछ दर्शक धीरे-धीरे वहां से जाने लगे। उनके अनुसार, दर्शकों ने टिकट के लिए अच्छी-खासी रकम खर्च की थी और वे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद लेकर आए थे।
उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि किसी लाइव इवेंट को आयोजित करने में काफी समय, पैसा और मेहनत लगती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं पता कि कार्यक्रम से पहले दलेर मेहंदी के परिवार या मैनेजमेंट को किसी परेशानी की जानकारी थी या नहीं।
‘कलाकार की विरासत दर्शकों की उम्मीदों से ऊपर नहीं’
सोना महापात्रा ने कहा कि किसी वरिष्ठ कलाकार के लंबे योगदान और प्रतिष्ठा का सम्मान जरूरी है, लेकिन इससे पेशेवर जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “दो बातें एक साथ सच हो सकती हैं। एक वरिष्ठ कलाकार अपने जीवनभर के योगदान के लिए सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता का हकदार है। वहीं, दर्शक भी ईमानदार प्रस्तुति के हकदार हैं या कम से कम इस बात की ईमानदार स्वीकारोक्ति के कि जब ऐसा करना संभव न हो, तो इसकी जानकारी दी जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई कलाकार अस्वस्थ है, तो स्थिति को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभाला जाना चाहिए। दर्शकों और आयोजकों को बिना किसी स्पष्ट जानकारी के बार-बार परेशानी नहीं झेलनी चाहिए।
‘सम्मान एकतरफा नहीं, दोनों तरफ से होना चाहिए’
सोना ने कहा कि वह एक कलाकार के तौर पर यह मुद्दा उठा रही हैं और उन्हें पता है कि उनके बयान पर आलोचना हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने पेशेवर जवाबदेही और दर्शकों के प्रति सम्मान को जरूरी बताया।
उन्होंने लिखा, “सम्मान एकतरफा अधिकार नहीं है। यह आपसी संबंध है। उम्र, विरासत और प्रतिष्ठा सम्मान के योग्य हैं, लेकिन वे हममें से किसी को भी पेशेवर जवाबदेही से मुक्त नहीं करते।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस शाम वहां मौजूद रहने के बावजूद उन्होंने खुद भी कुछ नहीं कहा था। अब वह इस बात पर विचार कर रही हैं कि क्या उनकी चुप्पी से किसी को मदद मिली थी।
अपनी बात के अंत में सोना ने दलेर मेहंदी की संगीत विरासत के प्रति सम्मान जताते हुए सवाल किया कि क्या दर्शक भी उतने ही सम्मान के हकदार नहीं हैं।
उत्तराखंड में मंत्री सुबोध उनियाल ने बीच कार्यक्रम में रोका था दलेर मेहंदी को
विवाद की शुरुआत रविवार को नई टिहरी में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के दौरान हुई। कार्यक्रम में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच हस्तक्षेप किया और उनके प्रदर्शन पर सवाल उठाए।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में मंत्री को गायक से कहते सुना गया कि उन्हें लोगों का मनोरंजन करने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन प्रस्तुति अपेक्षा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने दलेर मेहंदी की प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें अपने काम के साथ न्याय करना चाहिए।
बाद में सोशल मीडिया पर दलेर मेहंदी के नशे में होने और ठीक से गाना नहीं गा पाने के आरोप भी सामने आए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मीका सिंह और बादशाह ने किया दलेर मेहंदी का समर्थन
विवाद के बाद गायक मीका सिंह और बादशाह ने दलेर मेहंदी के समर्थन में प्रतिक्रिया दी। वहीं, सुबोध उनियाल ने ANI से बातचीत में दावा किया कि गायक लाइव गाने के बजाय लिप-सिंक कर रहे थे।
मंत्री ने यह भी दावा किया कि दलेर मेहंदी को कार्यक्रम के लिए 35 लाख रुपये दिए गए थे और वह इसलिए नाराज थे क्योंकि गायक लाइव प्रस्तुति नहीं दे रहे थे।
फिलहाल, इस पूरे विवाद में सोना महापात्रा की टिप्पणी ने कलाकारों के सम्मान, लाइव परफॉर्मेंस की गुणवत्ता और दर्शकों के प्रति जवाबदेही को लेकर बहस को नया आयाम दिया है।
