लेखक आईआईटी मुंबई में पढ़ाते थे और सन 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।
इन दिनों विभिन्न वजहों से स्वयंसेवी संस्थाएं (एनजीओ) खबरों में हैं। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री और आरएसएस प्रचारक नरेन्द्र मोदी ने दावा किया था कि आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है।…
इस समय पूरा देश अयोध्या के राममंदिर में चंदे की लूट से स्तब्ध है, सदमे में है। इस चंदा चोरी से पूरे देश को, और खासतौर से उन श्रद्धालुओं को गहरा धक्का लगा…
आरएसएस द्वारा प्रशिक्षित प्रचारक नाथूराम गोडसे ने सिर्फ इस वजह से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की छाती को तीन गोलियों से छलनी कर दिया था कि गांधी मानते थे कि देश सभी धर्मों के…
इस साल 10 जून को मोदी निरंतर भारत पर शासन करने वाले प्रधानमंत्री बन गए। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया।…
प्रसिद्ध इतिहासविद् रामचंद्र गुहा के ‘स्क्राल’ में हालिया प्रकाशित लेख “गांधी फैमिली हेस हेल्पड मोदी टू कन्सालीडेट हिस पावर” में पिछले दस से ज्यादा सालों में मोदी-भाजपा की ताकत में बढ़ोत्तरी का अत्यंत…
स्वतंत्रता के बाद भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित थी और वह शीत युद्ध के दोनों प्रमुख पात्रों – अमेरिका और सोवियत संघ – में से किसी के सामने नहीं…
हाल (मई 2026) में आए विधानसभा चुनावों के नतीजों की ब्रेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही थी। असम में परिसीमन से हेमंत विस्व सरमा को एक बार फिर विधानसभा चुनाव जीतने में मदद…
हाल में महाराष्ट्र का नासिक शहर दो बार अखबारों की सुर्खियों में रहा। पहली बार अशोक खरात के मामले को लेकर, जो एक ढ़ोंगी बाबा था और महिलाओं, खासकर समाज के उच्च वर्ग की महिलाओं, का…
लोकसभा की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के लिए महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था। लेकिन उसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस…
14 अप्रैल (2026) को बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती मनाने के साथ-साथ हमें इस मुद्दे पर भी विचार करना चाहिए कि बाबासाहेब की प्रमुख शिक्षाओं में से एक – जाति के उन्मूलन- के संदर्भ…
भगवान राम और अन्य देवताओं की खानपान की आदतों पर केन्द्रित ध्रुव राठी का एक वीडियो हाल में विवाद का मुद्दा बना। ध्रुव राठी के वीडियो गहन शोध और अध्ययन पर आधारित होते…
आसाराम बापू बलात्कार के मामले में सजा काट रहे हैं। राम रहीम इंसान हत्या और दुष्कर्म के दोषी पाये गए हैं और जेल में हैं, इन दिनों को पेरोल मिलने की खबरें हमें…
स्वतंत्रता के बाद भारत ने धर्मनिरपेक्षता व लोकतंत्र की राह चुनी। लेकिन देश में कुछ ऐसी शक्तियां थीं जो इन मूल्यों के खिलाफ थीं और वे बार-बार यह दुहराती रहीं कि भारत केवल…
ईरान पर इजराइल और संयुक्त राज्य अमरीका का हमला अत्यंत विनाशकारी साबित हुआ है। अधिकांश युद्धों की तरह, यह युद्ध भी अत्यंत बर्बर है। जंग शुरू करने का बहाना यह बनाया गया कि…
हमारे संविधान के मुताबिक देश के हर नागरिक को यह चुनने का सामाजिक एवं वैधानिक अधिकार है कि वह किस धर्म का पालन करे-या फिर किसी भी धर्म को न माने। इसके बावजूद…
टीपू सुल्तान का नाम समाचारपत्रों (विशषकर कर्नाटक के) में आता रहता है। ऐसा उनकी जयंती के राज्य-प्रायोजित आयोजनों के आसपास कुछ ज्यादा ही होता है। वहां भाजपा हमेशा इन आयोजनों में बाधा डालती…
भारत विविधताओं का देश है। यहां चकित कर देने वाली धार्मिक विविधताएं हैं। अंग्रेजों ने भारत की हिन्दू और मुस्लिम पहचानों का इस्तेमाल कर ‘फूट डालो और राज करो‘ की अपनी नीति के…
इस साल शहीद दिवस (30 जनवरी 2026) पर महात्मा गाँधी को याद करते हुए हमें यह अहसास भी है कि गांधीजी के मूल्यों और उनकी विरासत को कमजोर करने के लिए सतत प्रयास…
भारतीय संस्कृति क्या है? क्या वह विशुद्ध हिन्दू संस्कृति है या फिर कई संस्कृतियों का मिश्रण है? इन दिनों इस तरह के कई सवाल उठ रहे हैं। हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्र के पैरोकार…
राममंदिर आन्दोलन या दूसरे शब्दों में बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने से भाजपा और उसकी पितृ संस्था आरएसएस को चुनावों में जबरदस्त फायदा हुआ। अब काशी और मथुरा की बारी है। इस बीच…
भारतीय संविधान को आजादी के संघर्ष के मूल्यों के आधार पर गढ़ा गया है। संविधानसभा, जो मोटे तौर पर भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करती थी, ने भारतीय संविधान का निर्माण किया जो हमारे राष्ट्रीय…
अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा हमारे देश में आम हो गई है। उसका स्वरूप और तीव्रता बदलती रहती है पर मुसलमानों को डराने-धमकाने का सिलसिला कभी थमता नहीं है। दूसरे सबसे बड़े…
रामजन्मभूमि रथयात्रा के साथ ही भाजपा की ताकत में इजाफा होना शुरू हुआ। तभी से उसने अपनी छवि ‘पार्टी विथ ए डिफरेंस’ (एक अलग किस्म की पार्टी) की बनाना शुरू कर दी। धीरे-धीरे…
भाजपा पहचान से जुड़े मुद्दों के सहारे ही आगे बढ़ती रही है। वह ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल समाज को ध्रुवीकृत करने के लिए करती है और चुनावों में इसका फायदा उठाती है। अब…
सामंती समाज से आधुनिक उ़़द्योगों और समानता पर आधारित लोकतांत्रिक समाज बनने की भारत की यात्रा की शुरूआत औपनिवेशिक काल में ही हो गई थी। यह वह काल था जब आधुनिक उद्योगों के…