नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद और उत्तराखंड की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) प्रभारी कुमारी सैलजा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया है। उन्होंने इस फैसले को लोकतंत्र और न्याय के प्रति सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करने वाला बताया।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस ने शुरुआत से ही अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय विवादों में आए लोगों को संवैधानिक पदों पर नियुक्त कर रही है।
‘भाजपा सरकार नामों में से किसी एक को चुनकर राज्यपाल बना देती है’
कुमारी सैलजा ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। मामले में सामने आए कुछ नामों को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं और इसकी जांच भी जारी है।
उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा सरकार उन नामों में से किसी एक को चुनती है और उसे राज्यपाल बना देती है।”
सैलजा ने सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम किसी मामले में सार्वजनिक चर्चा में आ रहे हैं, उन्हें संवैधानिक पदों पर नियुक्त करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी नियुक्तियों से संबंधित व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण देने की कोशिश की जा सकती है।
हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम किसी मामले में सामने आना अपने आप में उसकी संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। आरोपों और उनकी पुष्टि के बीच अंतर करना जरूरी है।
अंकिता के माता-पिता की मांग: जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगे
इस बीच, अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर चिंता जताते हुए सरकार से नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि मामले से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में अंकिता के पिता ने कहा कि दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने आने के बावजूद उन्हें राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उत्तराखंड के लोग सड़कों पर उतरेंगे।
परिवार ने 18 और 19 सितंबर 2022 के दौरान अजय कुमार और दुष्यंत कुमार से संबंधित लोकेशन की जानकारी तथा कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
अंकिता की मां ने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी बेटी के लिए नहीं, बल्कि देश की सभी बेटियों के न्याय और सुरक्षा के लिए है। उन्होंने लोगों से परिवार का समर्थन जारी रखने की अपील की।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन, अंकिता के माता-पिता हिरासत में
गुरुवार सुबह दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर धरने के दौरान अंकिता भंडारी के माता-पिता और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया था। इसके बाद परिवार ने न्याय की मांग दोहराते हुए संबंधित नियुक्ति पर रोक लगाने की अपील की।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने पहले भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी के अन्य नेता पीड़ित परिवार के प्रति एकजुटता जताने पहुंचे थे।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि परिवार को न्याय दिलाने के बजाय सरकार ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का रास्ता चुना।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने मांग की कि 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि घटना के चार साल बाद भी मामले में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर सवाल अनुत्तरित हैं। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की गति पर भी सवाल उठाए।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी और 24 सितंबर 2022 को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था।
इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। मामले में न्याय की मांग समय-समय पर उठती रही है। अब दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति को लेकर अंकिता के परिवार और विपक्षी दलों ने नए सिरे से सवाल उठाए हैं।
