लद्दाख वार्ता पर सोनम वांगचुक असंतुष्ट, विधानसभा के अधिकारों पर मतभेद

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जम्मू-कश्मीर Updated On :

लेह: लद्दाख में लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधानसभा के अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच मतभेद बने हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA), लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के बीच हुई ताजा वार्ता को असंतोषजनक बताया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने और विधानसभा को पर्याप्त सुरक्षा एवं अधिकार देने के मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अब भी बड़ा अंतर है।

लेह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वांगचुक ने कहा कि बैठक का नतीजा लद्दाख के लोगों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। हालांकि, उन्होंने इसे पूरी तरह विफल वार्ता करार देने से इनकार किया, क्योंकि केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर की सुबह तक संशोधित मसौदा प्रस्ताव सौंपने का आश्वासन दिया है।

वांगचुक ने कहा कि संशोधित प्रस्ताव मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए मसौदे में स्थानीय प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों को शामिल किया जाएगा।

लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधानसभा के अधिकारों पर मतभेद

सोनम वांगचुक के मुताबिक, स्थानीय प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि बातचीत में कुछ सीमित मुद्दों पर ही मतभेद होंगे, लेकिन चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच बड़ा अंतर सामने आया।

उन्होंने कहा कि मुख्य मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था, विधानसभा के गठन और उसके अधिकारों को सुरक्षित रखने के उपायों को लेकर हैं। वांगचुक ने कहा कि इन मुद्दों पर बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, जिससे लद्दाख के प्रतिनिधि निराश हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र की ओर से संशोधित मसौदा मिलने तक बातचीत जारी मानी जाएगी। स्थानीय प्रतिनिधि नए प्रस्ताव की समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे।

22 अक्टूबर को दिल्ली में अगली बैठक की उम्मीद

वांगचुक ने बताया कि बातचीत का अगला दौर 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार का संशोधित मसौदा स्थानीय प्रतिनिधियों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा।

उन्होंने कहा कि लद्दाख के प्रतिनिधि चाहते हैं कि अगली बैठक में सकारात्मक परिणाम सामने आएं और क्षेत्र की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को उचित स्थान मिले।

छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य का दर्जा है प्रमुख मांग

लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने और पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं। इन मांगों का उद्देश्य क्षेत्र की स्थानीय पहचान, भूमि, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ प्रशासन में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने का प्रस्ताव सामने आया है। वांगचुक के अनुसार, इस व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए निर्वाचित विधायी निकाय की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि, स्थानीय प्रतिनिधियों की चिंता यह है कि लद्दाख के पास फिलहाल पूर्ण राज्य जैसी प्रशासनिक व्यवस्था चलाने और सरकारी कर्मचारियों के वेतन सहित उसके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आंतरिक राजस्व नहीं है।

हाइब्रिड विधानसभा मॉडल का प्रस्ताव

वित्तीय सीमाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए लद्दाख के प्रतिनिधियों ने हाइब्रिड विधानसभा मॉडल का विकल्प भी सुझाया है।

इस प्रस्ताव के तहत क्षेत्र को स्थानीय स्तर पर कानून बनाने और प्रशासनिक फैसले लेने की लोकतांत्रिक शक्तियां मिल सकेंगी, जबकि पूर्ण राज्य जैसी महंगी प्रशासनिक व्यवस्था का बोझ तत्काल नहीं उठाना पड़ेगा। यह मॉडल तब तक लागू रखने का विचार है, जब तक स्थानीय राजस्व व्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो जाती।

प्रस्तावित व्यवस्था में नौकरशाही को केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल (LG) के बजाय स्थानीय रूप से निर्वाचित नेतृत्व के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने की परिकल्पना है। इसका उद्देश्य लेह और कारगिल के लोगों की प्रशासनिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ाना है।

लद्दाख के भविष्य पर टिकी अगली वार्ता

लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को लेकर जारी बातचीत अब केंद्र सरकार के संशोधित मसौदे पर निर्भर है। स्थानीय प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि प्रस्ताव में विधानसभा के अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही और क्षेत्रीय हितों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट समाधान मिलेगा।

सोनम वांगचुक ने संकेत दिया है कि 22 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाली प्रस्तावित बैठक से पहले संशोधित मसौदे का आकलन किया जाएगा। ऐसे में केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच अगली वार्ता क्षेत्र की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



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