CJP का प्रदर्शन और फिर FIR, स्वतंत्र भारद्वाज केस में अब तक क्या-क्या हुआ?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के साथ मारपीट के मामले में विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (4 सितंबर) को स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। यह कार्रवाई उस वीडियो के वायरल होने के बाद हुई, जिसमें भारद्वाज एक व्यक्ति का सिर फोड़ने की बात करता नजर आया था। वीडियो में उसने राजनीतिक संपर्कों के दम पर जेल से बाहर आने का दावा भी किया था।

इस मामले में अब पुराने केस में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं, जबकि एक नाबालिग को कथित ऑनलाइन धमकी देने के आरोप में POCSO एक्ट के तहत अलग FIR भी दर्ज की गई है। आइए जानते हैं कि 23 जून से शुरू हुआ यह मामला अब यहां तक कैसे पहुंचा।

23 जून को जंतर-मंतर पर विवाद और संजय कुमार से मारपीट

इस मामले की शुरुआत 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन से हुई। जहां एक व्यक्ति अपनी नाबालिग बेटी के साथ प्रदर्शन में मौजूद था। आरोप है कि शाम करीब 5:30 बजे प्रदर्शन की वीडियो बनाने को लेकर उनका कुछ युवकों से विवाद हो गया।

शिकायत के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद दो-तीन लोगों ने युवक के साथ मारपीट की। आरोप है कि उनके सिर पर मुक्कों से हमला किया गया और कड़े जैसी किसी ठोस चीज से भी वार किया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को मौके से पकड़ा था।

23 जून के बाद संसद मार्ग थाने में FIR

पीड़ित की शिकायत पर संसद मार्ग थाने में FIR नंबर 62/2026 दर्ज की गई। शुरुआत में पुलिस ने BNS की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया। मेडिकल जांच में पीड़ित के सिर पर दो कटे हुए घाव दर्ज किए गए थे। बाद में यही मेडिकल रिपोर्ट मामले में चर्चा का विषय बनी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पीड़ित को गंभीर चोट लगी थी और पुलिस ने शुरुआत में अपेक्षाकृत हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को घटना के बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना था कि जांच आगे बढ़ रही थी और कानूनी प्रक्रिया के तहत चार्जशीट दाखिल की जानी थी। दूसरी तरफ, संजय कुमार के परिवार और CJP से जुड़े लोगों का आरोप था कि मामले में शुरुआत से ही कार्रवाई उतनी गंभीर नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी। यही वजह रही कि कई हफ्तों तक यह मामला चर्चा में नहीं रहने के बाद सितंबर में एक वायरल वीडियो के सामने आने के साथ फिर सुर्खियों में आ गया।

3 सितंबर को पॉडकास्ट वीडियो वायरल

3 सितंबर के आसपास स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इस वीडियो में वह उस व्यक्ति पर हमला करने की बात करता दिखाई दिया। वीडियो में उसने दावा किया कि उसने सिर पर कड़े से वार किया था और उन्हें कई टांके लगे थे। उसने यह भी दावा किया कि राजनीतिक संपर्कों की वजह से उसे जेल नहीं जाना पड़ा।

वायरल वीडियो में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कुछ राजनीतिक लोगों के नाम भी लिए गए। इसके बाद विपक्षी दलों और CJP से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था।

पीड़िता ने राहुल गांधी से लगाई न्याय की गुहार

वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित व्यक्ति की नाबालिग बेटी ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। इसमें उसने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि उसे अब तक न्याय नहीं मिला है और उसे उनसे न्याय की उम्मीद है। इसके बाद मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं रहा और राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की।

4 सितंबर को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन

वीडियो सामने आने के बाद CJP और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब आरोपी खुद वायरल वीडियो में हमले की बात कर रहा है, तो उसे अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत भी हुई। इसी दौरान पुलिस ने पुराने मारपीट के केस में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की कार्रवाई की।

मामले में राजनीतिक संरक्षण के आरोप सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने इन्हें खारिज किया। पुलिस का कहना था कि व्यक्ति की चोट को मेडिकल जांच में गंभीर या खोपड़ी में फ्रैक्चर वाली चोट नहीं बताया गया था। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को झड़प के दौरान कड़े से चोट लगी थी और स्वतंत्र भारद्वाज को घटना के बाद हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक कार्रवाई की जा रही थी।

4 सितंबर शाम बुलंदशहर से स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन और पुलिस पर बढ़ते दबाव के बीच दिल्ली पुलिस की टीम ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया। पुलिस को उसके बुलंदशहर में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम वहां पहुंची और उसे पकड़ लिया गया।

मारपीट के मामले में अब SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। पीड़ित परिवार और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगातार आरोप लगाया जा रहा था कि मामला दलित परिवार से जुड़ा होने के बावजूद शुरुआत में इस कानून के तहत कार्रवाई नहीं की गई।

इस मामले में 4 सितंबर को पीड़ित की नाबालिग बेटी की ओर से कथित ऑनलाइन धमकियों को लेकर शिकायत दी गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने अलग FIR दर्ज की, जिसमें क्रिमिनल इंटिमिडेशन और POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। इस नई FIR में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम है। यानी अब उसके खिलाफ एक तरफ मारपीट का पुराना मामला है, जिसमें SC/ST एक्ट जोड़ा गया है, तो दूसरी तरफ नाबालिग को कथित ऑनलाइन धमकी देने का अलग मामला भी दर्ज हो गया है।

अब आगे क्या?

फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया जा चुका है और पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। पुराने मारपीट केस में धाराएं बढ़ाई गई हैं और नाबालिग को कथित धमकी देने के मामले में POCSO के तहत नई FIR दर्ज हो चुकी है।

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम बात पुलिस की आगे की जांच होगी। वायरल वीडियो में किए गए दावों, संजय कुमार की मेडिकल रिपोर्ट और अब तक जुटाए गए सबूतों को जांच में देखा जाएगा। अब देखना होगा कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दोनों मामलों में कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

First Published on: September 5, 2026 9:24 AM
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