संविधान निर्माण…… और भुला दिए गए बाबू राजेंद्र प्रसाद

'भारत रत्न' डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने और उससे पहले वह संविधान सभा के अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में ही संविधान तैयार किया गया। आज भी जब संविधान निर्माण की बात होती है तो उन्हें भुला दिया जाता है।

नई दिल्ली। हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को : न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा, उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढाने के लिए, दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसे और वृहद बनाता है देश का लिखित और बड़ा संविधान। भारत का संविधान, विश्व में एकमात्र ऐसा संविधान है जहां राष्ट्र के नागरिकों के हितों का सर्वाधिक ख्याल रखा गया है। अक्सर जब बात संविधान निर्माण की बात आती है तो एक शख्स को हमेशा ही भुला दिया जाता है और वो हैं देश के प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद। संविधान बनाने को लेकर बाबू राजेंद्र प्रसाद जिस सम्मान के अधिकारी थे, वो सम्मान उन्हें कदाचित नहीं मिला।

‘भारत रत्न’ डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने और उससे पहले वह संविधान सभा के अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में ही संविधान तैयार किया गया। आज भी जब संविधान निर्माण की बात होती है तो उन्हें भुला दिया जाता है। संविधान तैयार करने के लिए जुलाई 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया, जिसमें कुल सदस्यों की संख्या 389 थी।

जानकार कहते हैं कि संविधान के निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जो योगदान है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि संविधान निर्माण के लिए जितनी ख्याति उन्हें मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। संविधान निर्माण के लिए कई समितियां बनी थीं और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता प्रदर्शित की थी। इसी कारण इतना अच्छा संविधान बनकर तैयार हुआ।

इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आज भी जब भी संविधान की चर्चा होती है, संविधान निर्माण के रूप में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का नाम लिया जाता है और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की कहीं चर्चा तक नहीं होती। राजेंद्र बाबू ने संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में अपना जो अंशदान किया, उसे भुलाया तो नहीं जा सकता।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डाक्टर ऑफ ला की सम्मानित उपाधि प्रदान करते समय कहा गया था “बाबू राजेंद्र प्रसाद ने अपने जीवन में सरल व नि:स्वार्थ सेवा का ज्वलन्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। जब वकील के व्यवसाय में चरम उत्कर्ष की उपलब्धि दूर नहीं रह गई थी, इन्हें राष्ट्रीय कार्य के लिए आह्वान मिला और उन्होंने व्यक्तिगत भावी उन्नति की सभी संभावनाओं को त्यागकर गाँवों में गरीबों तथा दीन कृषकों के बीच काम करना स्वीकार किया।”

First Published on: November 26, 2020 2:51 PM
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