फार्म-हाउस वाले किसान कर रहे हैं कृषि सुधारों का विरोध: हुक्मदेव नारायण यादव

नई दिल्ली। पूर्व सांसद हुक्मदेव नारायण यादव ने बयान जारी कर कहा है कि देश के किसानों और गरीबों को सावधान और सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ राजनीति करने वाले लोग कालनेमि के जैसे नकली किसान बन कर किसानों में भ्रम फैलाना चाहते हैं। संसद से सड़क तक उनका रूप दिखाई पड़ रहा है। मैं मूल रूप से किसान हूं। गांव में रह कर हल-कुदाल चला कर पढ़ाई करते और राजनीति करते यहां तक आया हूं।

किसान तीन तरह के होते हैं। हलधारी, छाताधारी और बंगलाधारी। हलधारी किसान वे हैं जो खुद अपने परिवार के सदस्यों और जरूरत होने पर मजदूर के साथ मिलकर खेत मे काम करते हैं। अपने पसीना और परिश्रम से खेती कर जीवन यापन करते हैं। जिन्हें सामान्यतः सीमांत और लघु किसान कहते हैं। छाताधारी वे होते हैं जो खेत के मेज पर बैठकर मजदूरों की निगरानी करते हैं तथा उन्हें काम बताते हैं। समय पर मजदूरों को नाश्ता-भोजन इत्यादि खेत पर पहुंचाते हैं। बंगलाधारी किसान वे होते हैं जिन्हें फार्म हाउस वाले कहते हैं। बड़े-बड़े लोग शौक करने के लिए फार्म हाउस बनाते हैं। उसमें आधुनिक सुविधाओं के सभी साधन होते हैं। सप्ताह में एक दो दिन के लिए यह छुटियों में फार्म हाउस पर जा कर मौज मस्ती करते हैं।

आज कल सिनेमा के हीरो और हीरोइनों के फार्म हाउसों की खूब चर्चा हो रही हैं। उद्योगपतियों, नौकरशाहों और समृद्ध राजनेताओं के फार्म हाउस काले धन को सफेद बनाने का काम करते हैं। ऐसे लाखों नकली बंगलाधारी किसान हैं जो कृषि आय के नाम पर कालेधन को सफेद बनाने में लगे रहे हैं। मुझे बताया गया कि एक एकड़ में 5 से 10 लाख रुपए की आमदनी बताते हैं।

देश के सीमांत और लघु किसानों की संख्या 82 प्रतिशत हैं। बिहार में 96 प्रतिशत हैं। कई राज्यों में 90 प्रतिशत से ज्यादा है। कृषि मंडियों पर बड़े-बड़े व्यापारियों, सरकारी नौकरशाहों और नकली कालनेमि रूपधारी राजनीतिक किसान नेताओं का चक्रव्यूह रहता हैं। बिचौलिया शब्द एक निराकार बात है। देश मे बाइस हजार ग्रामीण हाटों पर किसान अपना उत्पाद बेचने आता हैं और उपभोक्ता उनसे खरीदता है। वहां दलाल कही नही होता हैं। कई राज्यों में सरकारी मंडी कानून उन्हें अपना सामान बेचने से रोकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सीमांत और लघु किसानों को भय और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने का काम किया है। देश मे सड़को के किनारे किसान अपने खेत के फल और सब्जी को बेचते रहे हैं। अब निर्भय होकर बेचेंगे। किसान के लिए स्वर्णीम काल आ रहा है। संसद से सड़क तक राजनीतिक कालनेमि किसानों का भंडाफोड़ होने वाला है।

First Published on: September 26, 2020 2:43 PM
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