सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करने का निर्देश

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि पहले यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी लिखित आदेश है या सिर्फ मौखिक टिप्पणी। उन्होंने कहा कि खतरनाक श्रेणी के कुत्तों की पहचान करना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन अगर सभी सड़क पर रहने वाले कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाएगा तो यह चिंता और विरोध का विषय बनेगा।

सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि प्रशासन को सिर्फ उन कुत्तों को चिन्हित करना चाहिए जो वास्तव में लोगों के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा, “अगर सही तरीके से चिन्हित कर कार्रवाई की जाए तो सुप्रीम कोर्ट को तर्कसंगत फैसला लेना चाहिए, लेकिन सभी सड़क पर रहने वाले कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई गलत होगी।”

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को दूसरी जगह भेजने और उनके बंध्याकरण से जुड़े पुराने निर्देश वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने कहा कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के हमले से सुरक्षित रहने का अधिकार भी शामिल है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि देशभर में ‘पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम’ सही तरीके से लागू नहीं हो रहा और इसमें लगातार कमी देखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और विदेशी पर्यटक तक कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं। अदालत ने माना कि यह एक गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए राज्यों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।

First Published on: May 19, 2026 5:31 PM
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