जकार्ता: इंडोनेशिया में बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और जंगलों में लगी आग के विरोध में छात्रों ने देशभर में प्रदर्शन किया। मंगलवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के प्रशासन के दो साल पूरे होने के मौके पर जकार्ता, योग्याकार्ता और पश्चिमी जावा के बांडुंग में छात्रों और नागरिक संगठनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। द जकार्ता पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक दबाव, पर्यावरणीय नुकसान और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे उठाए।
महंगाई और जंगलों की आग पर सरकार को घेरा
जकार्ता में तुगु तानी स्मारक के आसपास सैकड़ों विश्वविद्यालय के छात्र एकत्र हुए। उन्होंने बढ़ती जीवन-यापन लागत और जंगलों तथा पीटलैंड में लगी आग से निपटने में सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि लंबे समय से जारी जंगलों की आग को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। उन्होंने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई, भ्रष्टाचार पर अंकुश और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाने की मांग भी की। इसके अलावा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा मजबूत करने की मांग उठाई गई।
जंगलों की आग से जनजीवन प्रभावित
इंडोनेशिया के सुमात्रा, कालीमंतन और पापुआ क्षेत्रों में जंगलों की आग पर काबू पाने की चुनौती बनी हुई है। असामान्य रूप से गंभीर अल नीनो-प्रभावित शुष्क मौसम ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।
आग से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण उड़ानें प्रभावित हुई हैं, स्कूल बंद करने पड़े हैं और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। धुएं का असर पड़ोसी देशों सिंगापुर और मलेशिया तक पहुंचने की खबर है, जिससे क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता पर चिंता बढ़ गई है।
आरटी की रिपोर्ट के अनुसार, अशांति के बीच प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस ट्रक में आग भी लगा दी।
राष्ट्रपति ने जंगलों की आग पर कार्रवाई तेज करने के दिए निर्देश
प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ और जनरल पुलिस अधिकारी लिस्ट्यो सिगित प्रबोवो ने बताया कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सोमवार को जकार्ता स्थित मर्देका पैलेस में जंगलों और भूमि में लगी आग से निपटने के प्रयास तेज करने को लेकर बैठक की।
लिस्ट्यो के मुताबिक, राष्ट्रपति ने हवाई अभियानों को मजबूत करने और इंडोनेशियाई सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी, स्थानीय प्रशासन तथा समुदायों के बीच बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि जंगलों और भूमि में आग लगने से कथित तौर पर जुड़ी 98 कंपनियों के मामलों की जांच में तेजी लाने को भी कहा गया है। राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ का कार्यालय सरकार की कार्रवाई की निगरानी करेगा। साथ ही, कानून प्रवर्तन की प्रक्रिया को साक्ष्यों के आधार पर और लागू नियमों के अनुरूप पूरा करने पर जोर दिया गया है।
ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने भी किया विरोध प्रदर्शन
मंगलवार को ग्रीनपीस इंडोनेशिया के कार्यकर्ता जकार्ता के होटल इंडोनेशिया ट्रैफिक सर्कल स्थित वेलकम मॉन्यूमेंट पर चढ़ गए। उन्होंने बड़े बैनर लगाकर लगातार लग रही जंगलों की आग से निपटने में सरकार की कथित विफलता के खिलाफ विरोध जताया।
इंडोनेशिया में इन प्रदर्शनों ने महंगाई, पर्यावरण संरक्षण, सरकारी जवाबदेही और नागरिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
